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सनातन धर्म के, चार धाम यात्रा की गरिमा को यादगार बनाइये ... जानिए उन रहस्यों को, जिससे, विज्ञान भी आश्चर्य चकित हो जाता है।


जीवन और धर्म और इस धर्म के तहत होने वाली यात्रा, मनुष्य के जीवन में एक अजीब सी खुशहाली लाती है और साथ में अजीब सी संतुष्टि भी देती है कि आज हमने अपने कर्तव्यों को पूरा करते हुए अपने धर्म यात्रा को पूरा कर लिया। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि चार धाम की यात्रा हिन्दू धर्म के लिए एक अहम कड़ी है।
इसलिए जीवन सुखमय हो या दुखमय इस यात्रा से आप कुछ समय के लिए, आप अपनी जिंदगी में ना केवल प्रकाश ला सकते हैं बल्कि जीवन को सदा ही सुखमय और खुशहाल बना सकते हैं, बशर्ते आपकी नियति नेक हो।
इसलिए उत्तराखण्ड प्रदेश यानि देव भूमि पर विर्जमान यह चार धाम जिसको हम आप यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के पवित्र नाम से जानते हैं यह केवल एक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि अध्यात्म और प्राकृतिक सौंदर्य का एक ऐसा दिव्य स्थान है जो हिन्दू धर्म को ही नहीं पूरे विश्व के आस्था और ध्यान को बहुत ही मनमोहक तरीक़े से खींचता रहता है। इसलिए पहले उन अनसुलझे सत्य को सबसे पहले जान लीजिए जो आपको इन धामों के बहुत नजदीक और आस्था के लगन से आपके मन के गहराइयों तक पहुंचता है। इसलिए वैज्ञानिकों के शोध के अनुसार, 13वीं से 17वीं शताब्दी के बीच केदारनाथ मंदिर पूरी तरह से बर्फ के नीचे दबा हुआ था। इसके बावजूद, मंदिर की संरचना को कोई नुकसान नहीं हुआ जो समय 400 साल के करीब होता हैं। तथा 2013 की भीषण बाढ़ में जब सब कुछ बह गया था, तब एक विशाल चट्टान (जिसे अब भीम शिला कहते हैं) मंदिर के ठीक पीछे आकर रुक गई। इस चट्टान ने पानी के बहाव को दो हिस्सों में बांट दिया, जिससे मुख्य मंदिर पूरी तरह सुरक्षित रहा। ये तो रहा केदारनाथ धाम के रहस्य जिसे वैज्ञानिक भी प्रमाणित नहीं कर पाये । इसी प्रकार बद्रीनाथ में जब सर्दियों में 6 महीने के लिए मंदिर के कपाट बंद होते हैं, तब वहां एक 'अखंड ज्योति' जलाई जाती है। आश्चर्य की बात यह है कि जब 6 महीने बाद कपाट खुलते हैं, तो वह दिव्य दीपक जलता हुआ मिलता है । तथा यही नहीं पुराणों के अनुसार, कलयुग के अंत में नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे और बद्रीनाथ का रास्ता बंद हो जाएगा। तब भगवान बद्रीनाथ की पूजा 'भविष्य बद्री' (जो जोशीमठ के पास स्थित है) में होगी। ऐसी मान्यता है।
यही नहीं यमुनोत्री में अत्यधिक ठंड के बावजूद 'सूर्य कुंड' के पानी का तापमान हमेशा 90°C से ऊपर रहता है। इसके पीछे का भूगर्भीय स्रोत आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
इसलिए इन सब आश्चर्य चकित कर देने वाले सत्य के बाद अब जान लीजिए चार धामों के स्तंभों के बारे में।
यमुनोत्री,यह यमुना नदी का उद्गम स्थल है। यहाँ देवी यमुना की पूजा होती है। यहाँ का मुख्य आकर्षण 'सूर्य कुंड' है, जहाँ का पानी इतना गर्म होता है कि श्रद्धालु उसमें पोटली में चावल डालकर पका लेते हैं और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।​
गंगोत्री यहाँ से गंगा नदी का उद्गम (गौमुख) होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा माता यहीं धरती पर अवतरित हुई थीं।​
केदारनाथ यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और भगवान शिव का निवास स्थान है। यह चारों धामों में सबसे दुर्गम है और मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित है।​
बद्रीनाथ यह भगवान विष्णु को समर्पित है। अलकनंदा नदी के किनारे बसा यह धाम 'मोक्ष' का द्वार माना जाता है। यहाँ 'तप्त कुंड' है, जहाँ बर्फीली पहाड़ियों के बीच प्राकृतिक रूप से गर्म पानी निकलता है।
इसलिए हिंदू धर्म में मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में एक बार श्रद्धापूर्वक चार धाम की यात्रा पूर्ण कर लेता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और वह मोक्ष (जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति) प्राप्त करता है। यह यात्रा अहंकार को मिटाने और प्रकृति के साथ जुड़ने का एक माध्यम है।
इसलिए आप सबका देव भूमि पर स्वागत और बन्दन है, प्यार और दुलार से एक बार पधार कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करे और देश तथा प्रदेश को भी गौरवान्वित करे।
सप्रेम धन्यवाद
🙏❤️🌹🎉

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