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दशकों से अन्न-जल त्यागकर जीवित रहे चुंदड़ी वाले माताजी प्रह्लाद जानी ब्रह्मलीन

बनासकांठा। गुजरात ही नहीं, अपितु पूरे देश में अपने भक्तों में चुंदड़ी वाले माताजी के रूप में मशहूर प्रहलाद जानी ब्रह्मलीन हो गए हैं। उन्होंने अपने वतन चराडा में बीती रात पौने तीन बजे अंतिम सांस ली। बुधवार को गब्बर स्थित उनके आश्रम पर उनके पार्थिव शरीर को भक्तों के दर्शनार्थ रखा जाएगा। गुरुवार 28 मई को सुबह 8.15 बजे उनके पार्थिव देह को समाधि दी जाएगी।

11 वर्ष की उम्र में ही अन्न और जल को त्याग देने वाले चुंदड़ी वाले माताजी बीते कई वर्षों से अन्न और जल के बिना ही जीवन व्यतीत कर रहे थे।  बुधवार को उनके पार्थिव देह को अंबाजी के गब्बर स्थित आश्रम में अंतिम दर्शन के लिए ले जाया जायेगा।

कई वर्षों तक बिना खाये पिये रहे। प्रहलाद जानी का जन्म 13 अगस्त 1929 को हुआ था। उन्होंने 10 वर्ष की उम्र में ही आध्यात्मिक जीवन अपना लिया और घर छोड़ कर चले गए। एक साल तक वे माता अंबे की भक्ति में डूबे रहे और साड़ी.सिंदूर व पथनी पहनने लगे। वे पूरी तरह महिलाओं की वेशभूषा और सिंगार करते थ। इसीलिए उनका नाम चुंदडी वाले माताजी पड़ गया। बीते 50 वर्ष से वे गुजरात के मशहूर तीर्थ स्थल अंबाजी मंदिर की गुफा के पास रहते थे। फिर तो वहीं उनका आश्रम भी बन गया।

बिना कुछ खाए-पीए जीवन व्यतीत करने के कारा चुंदड़ी वाले माताजी प्रह्लाद जानी सदैव चर्चा का केंद्र बने रहे। उनका दावा था कि, ‘उन्होंने 80 से भी अधिक वर्षों से कुछ नहीं खाया.पिया। कहा जाता है कि उन्हें कभी भूख नहीं लगती थी और न ही वे टॉयलेट जाते थे।’ उनके इस दावे की सच्चाई जानने के लिए कई बार वे वैज्ञानिकों से घिरे रहते थे। उन पर कई बार कई प्रकार के एक्सपेरीमेंट भी किए गए। डीआरडीओ ने एक बार उनके आसपास सीसीटीवी कैमरा रखकर 15 दिनों तक 24 घंटे नजर भी रखी थी। बिना खाये पिये इतने लंबे वक्त तक इंसान का जीवित रहना किसी आश्चर्य से कम नहीं हैं।

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