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हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धाराएं असंवैधानिक हैं और लैंगिक समानता का उल्लंघन करती हैं। का आरोप लगाने वाली याचिका पर हु

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धाराएं असंवैधानिक हैं और लैंगिक समानता का उल्लंघन करती हैं। का आरोप लगाने वाली याचिका पर हुई सुनवाई, जाने क्या हुआ फैसला

नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को ‘हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धाराएं असंवैधानिक हैं और लैंगिक समानता का उल्लंघन करती हैं” का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर सुनवाई की। यह मुद्दा ऐसे समय में उठा है, जबकि अल्पसंख्यक समुदायों के पर्सनल लॉ में लैंगिक अन्याय को आधार बनाकर देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने पर बहस चल रही है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जवाब देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। याचिका में कहा गया है। “अदालत को हिंदू महिलाओं की ओर से हस्तक्षेप करना चाहिए। क्योंकि जहां समाज लैंगिक समानता की ओर बढ़ रहा है, वहीं हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम लिंग के आधार पर भेदभाव करता है.” तीन जजों की बेंच कर रही है सुनवाई कमल अनंत खोपकर की ओर से दाखिल याचिका पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बेला त्रिवेदी की तीन जजों वाली बेंच सुनवाई कर रही है। याचिका हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधानों में “गहरी जड़ वाली पितृसत्तात्मक विचारधारा” की ओर इशारा करती है और यह बताती है कि कैसे विरासत के लिहाज से पति का परिवार मृत महिला के अपने माता-पिता से भी पहले पायदान पर आता है। याचिका में कहा गया है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधान बड़े पैमाने पर पुरुष वंश के भीतर संपत्ति को बनाए रखने की व्यवस्था करते हैं। याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि यह “अप्रासंगिक है कि पर्सनल लॉ को प्रथा या धर्म के आधार पर स्थापित किया गया था या इसे संहिताबद्ध किया गया है या नहीं। अगर यह लैंगिक समानता का उल्लंघन करता है। तो इसे चुनौती दी जा सकती है"

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  • Ashutosh Singh Saini

    Right sir