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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उज्जैन की पावन धरा पर "श्री महाकाल लोक" का लोकार्पण कार्यक्रम सम्पन्न हआ विश्व प्रसिद्

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उज्जैन की पावन धरा पर "श्री महाकाल लोक" का लोकार्पण कार्यक्रम सम्पन्न हआ
विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मन्दिर में आज ‘श्री महाकाल लोक’ का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किया। प्रधानमंत्री द्वारा रिमोट का बटन दबाते ही रंगीन कलावे से निर्मित शिव लिंग के रूप में भगवान महाकाल मानों स्वयं प्रकट हो गये। साथ ही पूरा वातावरण शिवमय हो गया। प्रधानमंत्री ने ‘श्री महाकाल लोक’ का भ्रमण कर निर्मित कलाकृतियों को देखा। प्रधानमंत्री ने लोकार्पण के पूर्व "श्री महाकाल लोक" में उपस्थित साधु-सन्तों का अभिवादन किया।
प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने "श्री महाकाल लोक" में निर्मित भित्ति चित्रों, स्तंभों एवं प्रतिमाओं में वर्णित शिव लीलाओं की जानकारी दी। इस दौरान राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने "श्री महाकाल लोक" में भगवान शंकर की ध्यानस्थ प्रतिमा, सप्तर्षि मंडल आदि का अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने ई-कार्ट में बैठ कर 900 मीटर लम्बे ‘श्री महाकाल लोक’ परिसर में निर्मित नयनाभिराम धार्मिक-आध्यात्मिक और शिव लीला पर आधारित कला रूपों का अवलोकन किया।
भारत के विभिन्न हिस्सों से आये लगभग 700 कलाकारों ने अपने नृत्य, गीत और अभिनय से भगवान शिव की लीलाओं की प्रस्तुति दी। विप्र समूह ने समवेत स्वरों में सस्वर वेद मंत्रों का पाठ किया। भगवान शंकर की लीलाओं की कलाकृतियों, वैदिक मंत्रोच्चार, कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों के बीच "श्री महाकाल लोक" जीवंत हो उठा। भारत सहित दुनिया के 40 देश इस आध्यात्मिक, अलौकिक, अद्वितीय एवं अदभुत अनुभूति के साक्षी बनें।
राज्य सरकार द्वारा सिंहस्थ-2016 में उज्जैन में विश्व स्तरीय अधो-संरचना का विकास किया गया। बनारस कॉरिडोर की तर्ज पर अब ‘श्री महाकाल लोक’ बनाया गया है। योजना के प्रथम चरण में भगवान महाकालेश्वर के आँगन में छोटे और बड़े रूद्र सागर, हरसिद्धि मन्दिर, चारधाम मन्दिर, विक्रम टीला आदि का विकास किया गया है।
लोकार्पित प्रथम चरण में 350 करोड़ से महाकाल प्लाजा, महाकाल कॉरिडोर, मिड-वे झोन, महाकाल थीम पार्क, घाट एवं डेक एरिया, नूतन स्कूल कॉम्पलेक्स, गणेश स्कूल कॉम्पलेक्स का कार्य पूर्ण हो चुका है। महाकाल कॉरिडोर के प्रथम घटक में पैदल चलने के लिये उपयुक्त 200 मीटर लम्बा मार्ग बनाया गया है। इसमें 25 फीट ऊँची एवं 500 मीटर लम्बी म्युरल वाल बनाई गई है। साथ ही 108 शिव स्तंभ, शिव की मुद्राओं सहित विविध प्रतिमाएँ निर्मित हो चुकी हैं, जो अलग ही छटा बिखेर रही हैं। लोटस पोंड, ओपन एरिया थिएटर तथा लेक फ्रंट एरिया, ई-रिक्शा एवं आकस्मिक वाहनों के लिये मार्ग भी बनाये गये हैं। बड़े रूद्र सागर की झील में स्वच्छ पानी भरा गया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि यह पानी स्वच्छ भी रहे। दूसरे चरण में महाराजवाड़ा परिसर का विकास किया जायेगा, जिसमें ऐतिहासिक महाराजवाड़ा भवन का हैरिटेज के रूप में पुन: उपयोग, कुंभ संग्रहालय के रूप में पुराने अवशेषों का समावेश कर महाकाल मन्दिर परिसर से एकीकरण किया जायेगा। दूसरे चरण के कार्य 2023-24 में पूर्ण होंगे।


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