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सूचना के अधिकार तहत नहीं दी जा रही जानकारी अधिकारी कर रहे भृष्टाचार में पर्दा डालने का काम l


पंचायती राज व्यवस्था में लगातार पारदर्शिता की बात तो कही जाती है लेकिन ऐसा होता नहीं हालांकि शासन द्वारा आय -व्यय को सार्वजनिक किये जाने की पूरी कोशिश होती है लेकिन पंचायतें ऐसा करती नहीं पंचायत पोर्टल में भी वही जानकारी फीड की जाती है जो पंचायत प्रतिनिधियों के पक्ष में होती है और जहां घालमेल किया जाता है उससे संबंधित जानकारी छुपा ली जाती है ।

इस तरह की जानकारी सार्वजनिक होने पर भी पंचायतों द्वारा कोई सफाई नहीं दी जाती और यदि सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज मांगे जाते हैं तो भी पंचायत की दादागिरी आम बात है समय- सीमा पर न तो जानकारी दी जाती है और न ही अधिकारियों के निर्देशों का पालन किया जाता हैl

ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया जब ग्राम पंचायत पड़रिया में स्थानीय व्यक्ति द्वारा आवेदन देकर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी चाही गई सूचना के अधिकार से संबंधित आवेदन 4 सितम्बर को दिया गया लेकिन 01 माह बीत जाने के बाद भी पंचायत द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई थक हारकर व्यक्ति ने प्रथम अपीलीय अधिकारी को इसकी जानकारी दी और वहां के मुख्य कार्यपालन अधिकारी में जनपद के बाबू को निर्देश दिया कि वे पंचायत तो नोटिस दें और आवेदन करता को यह कहा कि अब जो कुछ करना है बाबू को ही करना है लेकिन ना तो बाबू ने पंचायत को नोटिस जारी किया और ना ही पंचायत में जानकारी दी आवेदन करता का कहना है कि संबंधित लोग अब आदर्श आचरण संहिता लगे होने की दुहाई दे रहे हैं और कहते हैं कि आदर्श आचरण संहिता लगी होने के कारण काम का बोझ बढ़ गया है इसलिए जानकारी दे पाना फिलहाल संभव नहीं है।

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