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प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की मानीटरिंग एवं क्रियान्वयन समिति की जिला स्तरीय टास्क फोर्स कमेटी की बैठक संपन्न



उमरिया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत ऐसी गतिविधियां चयनित की जाए जिससे जिले की जीडीपी बढाई जा सके अर्थात तीन उद्योग इकाइयों से जिले के बाहर से पैसा जिले मे आए तथा जिले की जरूरतों के हिसाब से उत्पादन कर जिले के बाहर जाने वाले पैसे को जिले में ही रोका जाए। साथ ही अनुसूचित जाति एवं जन जाति के हितग्राहियो को योजना में प्राथमिकता दी जाए। इस आशय के निर्देश कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की मानीटरिंग एवं क्रियान्वयन समिति की जिला स्तरीय टास्क फोर्स कमेटी बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अंशुल गुप्ता , जिला पंचायत सदस्य मौजीलाल चौधरी तथा अमरू कोल , महाप्रबंधक उद्योग विजय कुमार शुक्ला , जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक, प्राचार्य पालीटेक्निक तथा आईटीआई के प्राचार्य उपस्थित रहे।
कलेक्टर ने कहा कि जिले में मत्स्य पालन , खाद्य प्रासंस्करण तथा पोहा मिल्क आदि की गतिविधियां संचालित की जा सकती है। आपने कहा कि पालीटेक्निक एवं आईटीआई के प्लेसमेंट आफीसर एसईसीएल तथा एमपीईबी एवं निर्माण कंपनियों से भेंटकर अपनी संस्थाआंे के पास आउट विद्यार्थियों को रोजगार से जोडने की पहल करें तथा उनकी आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कराए। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अंशुल गुप्ता ने कहा कि आगामी खण्ड स्तर पर आयोजित होने वाले बी एल सीसी बैठकों में जिला स्तर से भी अधिकारी भाग लेगे । आपने अग्रणी बैंक प्रबंधकों , संबंधित क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्यों को भी आमंत्रित करनें की बात कही। इस अवसर पर समिति के सदस्य मौजीलाल चौधरी तथा अमरू कोल ने भी अपने सुझाव दिए।
महाप्रबंधक उद्योग विजय शुक्ला ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत पांच प्रकरण वितरित किए गए। आपने बताया कि विभाग द्वारा 1 करोड के 39 प्रकरण विभिन्न बैको में प्रेषित किए गए। जिनमे से 18 प्रकरण सेवा क्षेत्र के तथा अन्य प्रकरण अन्य ट्रेडों से प्रेषित किए गए। आपने बताया कि योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु आवेदक को आनलाइन आवेदन करना है। जिला व्यापार उद्योग कंेद्र द्वारा परीक्षण उपरांत स्कोरिंग शीट के अनुसार दस्तावेज प्राप्त कर उपयोग किए जाते है तथा 60 से अधिक मार्क्स प्राप्त होने पर प्रकरण सीधे बैकों को प्रेषित किए जाते है। बैकों द्वारा स्वीकृत एवं वितरण की कार्यवाही की जाती है। स्वीकृत उपरांत आवेदक को 10 दिवसीय उद्यमिता विकास प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होता है ।

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