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उप-जिला अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों पर हमला, रिपोर्ट दर्ज, पुलिस सुरक्षा की मांग

इंदापुर  (पुणे, महाराष्ट्र)। कोरोना काल से जुड़े भयानक आपदा के चलते बीते पांच माह से अपने व्यक्तिगत जीवन तथा अपने परिवार से अलग थलग होकर कोरोना मरीजों के इलाज में जी जान से जुटे इंदापुर उप-जिला अस्पताल के डॉक्टर तथा कर्मचारियों पर मरीज के परिजन द्वारा हमला करने की अफसोसनाक घटना 16 सितंबर की रात में घटी, जिसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों में काफी गुस्सा तथा महिला कर्मचारियों में डर का माहौल पैदा हो गया। इसी घटना के चलते इंदापुर उप-जिला अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग जोर पकड़ रही है। 16 सितंबर की देर रात इंदापुर पुलिस थाने में शंकर सुरेश जाधव (शेलगांव, तालुका इंदापुर, जि. पुणे) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पूरा घटनाक्रम इस तरह है की, पूना जिले के इंदापुर तालुका के गांव शेलगांव की रहनेवाली हीराबाई सुरेश जाधव (उम्र 55 वर्ष) नामक  महिला को 16 सितंबर की शाम करीब छह बजे गंभीर हालत में इंदापुर उप-जिला अस्पताल में उनके परिजनों द्वारा इलाज हेतु लाया गया। चूंकि महिला की हृदय गति 24/मिनट के आसपास थी और ऑक्सीजन का स्तर 60 प्रतिशत के आसपास था, इसलिए ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उसके परिजनों को सलाह दी कि मरीज को बारामती (जि. पुणे) के अस्पताल ले जाया जाए, मगर मरीज के रिश्तेदारों के अनुरोध के बाद, उपजिला अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी अधीक्षक डॉ. चंदनशिवे ने ड्यूटी पर मौजूद डॉ. अनिरुद्ध गार्डे को निर्देश दिया कि वे मरीज को तुरंत इंदापुर उप-जिला अस्पताल की डेडिकेटेड कोविड यूनिट में भर्ती करें, उसका कोविड परीक्षण करें और आवश्यकतानुसार उपचार शुरू करें।

डॉ. अनिरुद्ध गार्डे ने तुरंत मरीज को भर्ती किया और वेंटिलेटर और एट्रोपिन, एड्रेनालाईन दवाइयों के माध्यम से मरीज का ऑक्सीजन स्तर बहाल करने का प्रयास किया, मगर मरीज का शरीर उपचार के लिए बिल्कुल भी साथ नहीं दे रहा था। इसी वजह से मरीज की स्थिति गंभीर होती जा रही थी। डॉ. गार्डे ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चंदनशिवे और चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुहास शेलके को पूरा मामला बताया। उसके बाद डॉ. चंदनशिवे ने मरीज के रिश्तेदारों को गंभीर स्थिति के बारे में अवगत कराया। दुर्भाग्य से डॉक्टरों के अथक प्रयास के बावजूद लगभग रात 8 बजे इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु हो गयी, जिसके पश्चात वेंटिलेटर को हटा दिया गया। उधर कई स्पष्टीकरणों के बाद भी मरीज के रिश्तेदार शंकर सुरेश जाधव (शेलगांव, ता. इंदापुर, जि.पुणे) ने डॉक्टरों पर वेंटिलेटर हटाने से ही मरीज की मौत होने का आरोप लगाकर, डॉ. अनिरुद्ध गार्डे, महिला कर्मचारी तथा अन्य कर्मचारियों को धमकाने के साथ साथ उन्हें मारना शुरू कर दिया, उन्हें झूठे अपराध में फंसाने की धमकी दी, गाली दी और उन्हें लात-घूसों से पीटना शुरू किया। बताया जाता है कि मारपीट करनेवाले शंकर सुरेश जाधव एसआरपीएफ में कार्यरत हैं।

 इस घटना के बाद इंदापुर उप-जिला अस्पताल के डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने की मांग जोर पकड़ रही है। उपरोक्त गंभीर मामले के बाद इंदापुर उप-जिला अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. एकनाथ चंदनशिवे ने 16 सितंबर की रात शंकर सुरेश जाधव के खिलाफ इंदापुर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की है, जिसके बाद शंकर जाधव पर भारतीय दंडसंहिता 1860 की धारा 353 (सरकारी काम में बाधा पहुंचाना), धारा 332 (ड्यूटी पर रहते हुए सरकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट करना), भारतीय दंड संहिता, 427 (सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना), धारा 504 (गालियां देना) और धारा 506 (धमकाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच इंदापुर पुलिस थाने के सहायक पुलिस निरीक्षक गणेश लोकरे कर रहे हैं।

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