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खत्म ए तराबीह के मौके पर मांगी गई देश भर के लिए अमन व शांति की दुआ दुनिया में सबसे बेहतर किताब क़ुरान है (मौलाना गुल

खत्म ए तराबीह के मौके पर मांगी गई देश भर के लिए अमन व शांति की दुआ

दुनिया में सबसे बेहतर किताब क़ुरान है (मौलाना गुलाम मुस्तफा अशरफी इमाम ताहिरा मस्जिद)

क़ुरान का सीखना और सिखाना सबपर लाज़िमी है। (सय्यद नूरुद्दीन अशरफ़ मुतवल्ली ताहिरा मस्जिद)

दिनांक 20/03/2024 बरोज बुधवार को दरगाह किछौछा शरीफ में विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत सैय्यद मखदूम अशरफ़ जहांगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैहे की मजार शरीफ के करीब दरगाह बाईपास स्थित ताहिरा मस्जिद में दसवीं तराबीह में क़ुरान मुकम्मल किया गया जिसमें बड़ी ही लगन मेहनत व तलफ़्फ़ुज़ व तरकीब की अदायगी के साथ हाफ़िज़ व कारी मोहम्मद नईम अशरफी गोलपुरी ने मुकम्मल किया
उसके बाद जश्ने तकमील ए क़ुरान मनाया गया जिसमें खुसूसी खिताब खरीफ ए शैखुल इस्लाम हज़रत अल्लामा मौलाना गुलाम मुस्तफा अशरफी जामई इमाम ताहिरा मस्जिद ने किया उन्होंने कहा कि इस्लाम में सबसे ज्यादा अहमियत जिस किताब को हासिल है वो क़ुरान है और कहा जब तक दुनिया बाकी है क़ुरान नहीं मिट सकता एक शेर से अपनी तकरीर का आगाज़ किया कहा
ऊंचा जो चढ़ गया है गिराया ना जाएगा
रिफअत की मंजिलों से हटाया ना जाएगा
खुद रब्बे कायनात ने रौशन किया जिसे
फूंकों से वोह चिराग बुझाया ना जाएगा

कारी नईम ने नात शरीफ के अश्आर पेश किए इस मौके पर सय्यद नूरुद्दीन अशरफ़ डायरेक्टर एस एस हैल्थ सैंटर व मोतवल्ली ताहिरा मस्जिद ; मोहम्मद कलीम , सदरे आलम, मोहम्मद इश्तियाक, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद लईक, निसार, कासिम,नदीम, हाफ़िज़ नईम , दिलशाद, व अन्य लोगों ने शिरकत की पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए खुसूसी दुआ पर इस महफिल का इख्तिताम हुआ।

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