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तेरहवीं पर विशेष | -------------------------------- देवरी पंधी दीवान परिवार का चमकता सितारा असमय अस्त हो गया |

स्व डाक्टर शंकर धर दीवान --------------------------------------
आज तेरहवीं पर विशेष |
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देवरी पंधी दीवान परिवार का चमकता सितारा असमय अस्त हो गया |
डाक्टरी से उनकी पहचान ऐसे बनी कि देवरी के आसपास के दस गाँव के लोग उनके द्वारा जांच करते ही ठीक हो जाया करते थे और चाचा जी का गुणगान करते थे, ये गुणगान वर्षों वर्षों तक चलेगा, यही तो कमाई है जीवन की, जिसे शंकर चाचा ने बहुत कमाया ||
स्व श्याम धर दीवान ( पंडित गौंटिया) व स्व सुंदरी देवी ( गतौरहीन दाई) के चार संतानों में सबसे छोटे थे | छोटे होने के कारण प्यार दुलार इन्हें ज्यादा मिलता था | जिसके कारण पढ़ाई में साधरण थे पर मस्ती में आगे | कक्षा नवमीं में जब गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ते थे, इनका हास्टल नार्मल स्कूल में लगता था वहाँ सबसे ज्यादा चर्चित शंकर चाचा थे | इनके सभी सहपाठी इन्हें हमेशा याद करते हैं, इनके सहपाठी वर्तमान विपक्ष के नेता डा.चरण दास महंत भी थे, ये ईनको हमेशा पुछते, उनकी उन्नति देखकर बडे खुश होते थे कहते शंकर धर बहुत आगे बढीस | लाल बहादुर शास्त्री स्कूल में रात्रि में लगता होम्योपैथी काॅलेज का क्लास उसको ज्वाइन किए और देवरी में प्रेक्टिस शुरू कर दिए पर अनुभवी लोगों से डाक्टरी के गुण खुब सीखे पंधी वाले डाक्टर त्रिपाठी, देवरी के डाक्टर शीतल धर व डाक्टर यदुनाथ धर | अपनी मेहनत लगन से बहुत जल्द सफलता पाए, स्वयं इंजेक्शन लगाना, ग्लूकोज का सलाईन लगाना, आक्सीजन लगाना स्वयं करते थे |
सभी लोग उनसे अपनापन पाते थे परिवार के क्या बडे, क्या छोटे, क्या बच्चे, क्या बहु और क्या बेटियां || हजारों लोगों को ठीक करने वाले शंकर चाचा अपने इलाज के लिए समय नहीं दिए, परिवार को सेवा करने का अवसर भी नहीं दिए, चल पडे अनंत यात्रा पर | उनकी मधुर यादें हम सबको हमेशा याद आती रहेगी | उनका हंसता हुआ चेहरा सबके आंखो में हमेशा झुलेगा |
सम्मान समारोह में मंच के सामने बैठे थे हम दोनों, जब पत्रिका उन्हें दी गयी, खोल के कुछ पन्ना देखे फिर मेरे पीठ को थपथपाए, नहीं कहते हुए बहुत कुछ कह गये, परिवार में किसी के यहाँ दुख हो शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद पहुचते थे |
कहते हैं जिंदगी सिर्फ तीन पन्नों का | पहले पन्ने में जन्म व आखिरी पन्ने में मृत्यु विधाता पहले से लिख देते हैं, बीच का पन्ना आपका ,दोनों के बीच के समय में जीतना अधिक अच्छा काम कर लो || हमारे शंकर चाचा ये बीच के समय में अनगिनत अच्छे कार्य किए , असहाय लोगों को ठीक किए, पुजा पाठ खुब किए, सबका दुख दर्द सुने और सहायता भी किए व्यवहार उनका लाजवाब | सबके आंखों में पानी दे गये ||
आदरणीय स्व डाक्टर शंकर चाचा के पवित्र आत्मा को श्रद्धा सुमन अर्पित ||

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अविनाश धर दीवान

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