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चार साल में पूरी हुई राउरकेला स्मार्ट सिटी की तीन परियोजनाएं

राउरकेला (सुंदरगढ़)। राउरकेला को स्मार्ट सिटी घोषित किए हुए चार साल बीत चुके हैं। हालांकि, शहर ने उस हिसाब से विकास को अब तक नहीं देखा है। चाहे इसे विभागीय अधिकारियों की लापरवाही कहे या जनप्रतिनिधियों में इच्छाशक्ति की कमी। चार साल में, केवल तीन परियोजनाएं पूरी होना गंभीर मसला है। जो तीन परियोजनाएं पूरी हुई हैं, उनकी शुरुआत पहले राउरकेला महानगर निगम (आरएमसी) द्वारा की गयी थी। इनमें परियोजनाओं का स्थलाकृतिक सर्वेक्षण, खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) और छह पार्कों का विकास शामिल हैं। अन्य 26 परियोजनाओं के संदर्भ में किसी के पास संतोषजनक जवाब नहीं है। 

इनमें से कुछ परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं एवं कुछ का टेंडर रद कर दिया गया है। कुछ परियोजनाओं के लिए डीपीआर की तैयारी चल रही है। पानपोष सर्किट हाउस के पास 11.6 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन बीजू पटनायक इंडोर स्टेडियम की चहारदीवारी का काम अभी पूरा हुआ है। 26.47 करोड़ रुपये की स्मार्ट सिटी रोड (फेज -1) का अभी भूमिगत सेवा ही पूरा हुआ है। बस शेल्टर सहित अन्य काम चल रहे है। 

यही हाल बिरसामुंडा स्टेडियम में मल्टी-पार्किंग और अन्य कार्यों का है, जो 134.8 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन है। 49.52 लाख रुपये की लागत से पानपोष मार्केट का अभी तक शिलान्यास ही हुआ है। अस्थाई रूप से पुनर्वास कराए गए दुकानदार कब मार्केट कांप्लेक्स में आएंगे, यह कहना मुश्किल है।  इसके अलावा 2.8 करोड़ रुपये से स्मार्ट बस शेल्टर, 8 करोड़ से स्मार्ट बस टर्मिनल, 47.4 करोड़ से ब्राह्मणी नदी के किनारे का सौंदर्यीकरण, 11.48 करोड़ से बसंती कॉलोनी डीएवी तालाब का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण, 2.81 करोड़ से वीएसएस साप्ताहिक हाट के विकास के लिए कार्यादेश जारी किया गया है। 

पांच करोड़ की लागत से शहर के स्लम इलाकों में एलईडी लाइटिग सेवा के लिए निविदाओं का इंतजार है। 12.27 करोड़ रुपए से 24 प्रमुख पार्कों का विकास, पावर हाउस रोड और ट्रैफिक चौक के पार्किंग सिस्टम के लिए कार्य आदेश जारी किए गए हैं। 1.20 करोड़ रुपये के 3 डी फ्लेक्स कार्य प्रस्ताव में ही रुका पड़ा है। इसी तरह, राज्य आवास और शहरी विकास विभाग के साथ 10 करोड़ की लागत से एक महिला छात्रावास बनाने के लिए बातचीत चल रही है।

 इसके अलावा, 105 करोड़ तूफान जल प्रबंधन, 2.81 करोड़ से स्मार्ट क्लासरूम, और 1.1 करोड़ से डिजिटल स्वास्थ्य देखभाल परियोजना के डीपीआर की तैयारी चल रही हैं। लेकिन कब डीपीआर बनेगा व काम शुरू होगा, किसी को कोई जानकारी नहीं है।  हालांकि, पिछले चार साल में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की स्थिति ने शहर को आश्चर्यचकित कर दिया है। इस बीच, इस परियोजना के लिए आए पैसे बिना खर्च हुए ही बैंक में पड़े है। राशि खर्च नहीं हो पाने के कारण 2019-20 के वित्तीय वर्ष में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ओर से कोई पैसा नहीं आया। 

2015-16 में स्मार्टसिटी के लिए केवल 2 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। 2016-17 में यह राशि बढ़कर 150 करोड़ रुपये हो गई थी। 2017-18 में 224 करोड़ मंजूर हुआ था। इस तरह कुल 376 करोड़ मंजूर हो चुकी है। इसमें राज्य सरकार ने 188 तथा केंद्र सरकार ने 188 करोड़ रुपये दिए हैं। खर्च नहीं होने के कारण 266.83 करोड़ रुपये पड़े हुए है। हैरानी की बात है कि परियोजना तो आगे नहीं बढ़ी है, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन पर 3.23 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।  


राउरकेला स्मार्टसिटी लिमिटेड में 11 अधिकारी और कर्मचारी : राउरकेला स्मार्टसिटी लिमिटेड में 11 अधिकारी और कर्मचारी है। इनका वेतन 37,500 से लेकर 1.35 लाख रुपये तक है। वर्ष 2016-17 में वेतन मद में 50 लाख, 2019-24 में 1.30 करोड़ और 2019-20 में 1.43 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। विडंबना यह है कि शहर में होने वाले सभी काम नियमों के अनुसार नहीं हो रहे हैं। इसके लिए शहरवासियों को एक नहीं कई समस्या का सामना करना पड़ता है। 

पानपोष गांधी चौक से अंबेडकर चौक तक लगभग 3.7 किमी सड़क को स्मार्ट सिटी रोड बनाया जा रहा है। हायरिग एजेंसी उतना अच्छा काम नहीं कर रही है जितना उसे करना चाहिए था, जिससे पैदल चलने वालों से लेकर वाहन चालकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। दिन के समय धूल इतनी उड़ रही है कि सड़क के दोनों किनारे दुकानदारों के साथ-साथ राहगीरों को पैदल चलना मुश्किल हो जाता है।

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