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गरीबों की बैंक बनी बीसी सखिया 1300 करोड का कराया लेनदेन

प्रयागराज। चूल्हे-चौके तक सिमटीं महिलाओं की जिंदगी में आजीविका मिशन ने रोशनी बिखेर दी है। इस मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों के जरिये जुड़ीं बीसी सखी लोगों के खाते खुलवाने , आहरण-वितरण कराने से लेकर अन्य बैंकिंग सेवाओं को लेकर लोगों के द्वार पहुंच रही हैं। जिले में पांच साल में 1300 करोड़ रुपये लेनदेन करवा कर बीसी सखियों ने मिसाल कायम की है।

बीसी सखियां बैकिंग के जरिये कमाइ भी कर रही हैं। इन महिलाओं को इससे सीधे तौर पर प्रतिमाह आठ से 10 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं लोगों के बैंक खाते खुलवाकर और लेनदेन करने में बैंकों की मदद कर रही हैं। दो साल पहले बीसी सखी बनीं सैदाबाद की ब्यूर गांव की रहने वाली रीनू सिंह ने भी दो साल में 7200 से अधिक खाते खोलकर अब तक 10 करोड का टांजेक्शन कर अपनी -पहचान बनाई। रीनू बताती हैं कि वह भी एक प्राइवेट स्कूल मे शिक्षिका थीं। बीसी सखी के बारे में सुना तो इसे करने का निर्णय लिया। पति ने भी इस काम में सहयोग किया और उन्हीं के साथ इस काम को कर पा रही हैं। रीनू कहती हैं कि महंगाई के दौर में घर का खर्च चलाने केलिए महिलाओं को घर से निकलना ही पड़ता है। कई बार तो ऐसा भी हुआ कि 25-30 किलोमीटर तक का सफर तय करके लेन-देन करना पड़ता है। पहले काम में काफी सारी चुनौतियां थी लेकिन अब लोग पहचानने लगे हैं इसलिए काम कुछ हद तक आसान हो गया है। वही तीन साल पहले बीसी सखी बनीं सैदाबाद की रीना कुमारी ने पिछले तीन साल में 22 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया। जो कि रिकॉर्ड है। उन्हें इसके एवज में कमीशन के रूप में रुपये से अधिक की आय हुई है

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