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भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर सभी देश वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं

नमस्कार, आइमा मीडिया पर आपका स्वागत है।

आज यानि शुक्रवार 10 मई को भगवान परशुराम का जन्मोत्सव है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया अथवा अक्षय तृतीया के अवसर पर देशवासी परशुराम जन्मोत्सव मनाते हैं। उन्हें नारायण अर्थात् भगवान विष्णु का छठा अवतार माना गया है। मान्यता है कि कलयुग में मौजूद आठ चिरंजीवी में से एक परशुरामजी हैं, जो कि किसी न किसी रूप में आज भी धरती पर मौजूद हैं।

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना गया है। जमदग्नि ऋषि एवं रेूणुका की संतान परशुराम के चार बड़े भाई थे। उनके नाम रुक्मवान, सुषेण, वसु और विश्वावसु थे। परशुराम अत्यंत क्रोधी स्वभाव के थे।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार मां रेणुका नदी में स्नान करने गई थीं। जब वे स्नान करके वापस लौट रही थीं, उसी समय उन्होंने राजा चित्ररथ को जलविहार करते देखा। राजा के सौंदर्य को देखकर देवी रेणुका मोहित हो गईं। ऐसे में जब वे घर पहुंचीं तो उन्हें देखकर महर्षि जमदग्नि उनकी मनोदशा को समझ गए। उन्होंने अपने पुत्रों को मां का वध करने का आदेश दिया। इस पर उनके चार पुत्रों ने पिता के इस आदेश को मानने से इंकार कर दिया। इस पर उन्होंने क्रोधित होकर अपने उक्त चारों पुत्रों की विचार शक्ति खत्म होने का शाप दे दिया। उसी वक्त परशुराम वहां पहुंचे तो महर्षि जमदग्नि ने उनसे भी मां का वध करने को कहा। इस पर परशुराम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए मां का वध कर दिया।

इस पर महर्षि जमदग्नि काफी प्रसन्न हो गए और परशुराम से तीन वर मांगने को कहा। इस पर परशुराम ने पहला वर मां को जीवित ​करने तथा दूसरा अपने भाइयों को पहले की भांति सही स्थिति में लाने का मांगा। इसके अलावा तीसरे वर में अपने पिता से उन्होंने कहा कि जीवन में कभी पराजय का सामना न करना पड़े तथा लंबी आयुप्राप्त हो। पिता ने तथास्तु कहकर उन्हें तीनों वर दे दिए।


प्राचीन कथाओं के अनुसार पहले इनका नाम राम था। देवाधिदेव महादेव ने इन्हें शस्त्र विद्या दी थी। शस्त्र विद्या के बाद प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें अपना फरसा प्रदान किया था। फरसा अर्थात 'परशु' मिलने के कारण उनका नाम परशुराम पड़ गया। इसके सा​थ ही शिवजी से इन्हें श्रेष्ठ योद्धा का वरदान भी प्राप्त हुआ था। कहा जाता है कि परशुराम का जन्म ऋषियों मुनियों की रक्षा के लिए हुआ था। इसके अतिरिक्त वे युद्धकला में भी माहिर हैं। उन्होंने भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य तथा कर्ण जैसे कई योद्धाओं को शिक्षा दी।

मान्यताओं के अनुसार, कलयुग में भगवान विष्णु कल्कि अवतार के रूप में जन्म लेंगे। वे देवताओं को युद्ध की नीतियां सिखाएंगे। आल इंडिया मीडिया एसोसिएशन की ओर से सभी देशवासियों को भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं।

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