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गौरव सम्मान समारोह में नवाचारी अग्रणी किसानों को किया सम्मानित अग्रणी किसान कृषि आधारित प्रसंस्करण लगाकर किसान खेती में रसायनों का उपयोग कर करें तो प्रसंस्करण के माध्यम से मिल सकता है भारी मुनाफा

झालावाड़ 19 मई, कृषि के क्षेत्र में विशेष रूप से नवाचार करने वाले अग्रणी किसानों का कृषि गौरव सम्मान समारोह रविवार को गीतांजलि भवन में आयोजित किया गया। आयोजक ब्रजेश चौधरी ने बताया कि समारोह में कृषि को नई उंचाई तक पहुंचाने वाले किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विभाग से जुड़े कर्मचारियों, दूध उत्पादक डेयरी फार्म, कृषि आधारित उद्यमियों, कृषि एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को भी कृषि गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर एवं माल्यार्पण कर किया गया। प्रारंभ में समारोह के आयोजक ब्रजेश चौधरी ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत अभिनंदन किया। कार्यक्रम संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार कैलाश चंद मीणा, दिन डॉक्टर आईबी मौर्य, सरस डेयरी प्रबंध संचालक प्रमोद चरण ने किसानों को महत्वपूर्ण जानकारियां दी। कार्यक्रम संयोजक ब्रिजेश चौधरी, रमेश पांडा, साहित्य कृषि निदेशक कोटा राजवीर सिंह, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक टी ए बांसोड़
, उद्यान विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर देवेंद्र चौधरी, नेवी कार्यक्रम को संबोधित किया।
संचालन राजवीर सिंह ने किया।
इस मौके पर नवाचारी किसानों, कृषि विभाग से जुड़े उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों को स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैलाश चंद मीणा संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार विभाग ने कहा कि हाड़ौती में खेती का बंपर उत्पादन होता है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता, इसका कारण है कि किसानों की उपज की यहां प्रसंस्करण नहीं हो पाता। यदि क्षेत्र के अग्रणी किसान कृषि आधारित छोटे-छोटे प्रसंस्करण यूनिट लगाकर यदि लहसुन, प्याज, धनिया, गेहूं, सोयाबीन की प्रोसेसिंग कर उनको बाजार में बेचें तो इससे जहां किसानों की उपज की मांग बढ़ने से उन्हें उपज का अच्छा दाम भी मिलेगा और रोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि प्रसंस्करण के लिए किसानों को सोयाबीन का पनीर, धनिये की पिसाई, गेहूं का आटा, सरसों का तेल निकालने की यूनिट जैसे उद्यम शुरू कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों को इसके लिए अनुदान भी देती है।


ने कहा कि किसानों को खेती में रसायन का उपयोग भी कम से कम करना चाहिए, क्योंकि कई बार विदेशों में कृषि उत्पादन निर्यात के दौरान रसायन की अधिक मात्रा आने पर वहां रिजेक्ट हो जाते हैं, ऐसे में किसानों को खेती में रसायन का उपयोग कम करना चाहिए। इसके साथ ही किसानों को जैविक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।राज्य सरकार द्वारा सहकारी बैंकों के माध्यम से बहुत ही सस्ते दर पर ऋण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसका किसानों को अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए।


कृषि अग्रणी और नवाचारी किसानों को इस तरह से सम्मानित करने से उन्हें और अधिक अच्छा कार्य करने का प्रोत्साहन मिलेगा और दूसरे किसानों को भी इस तरह की प्रेरणा मिलेगी। नाबार्ड के डीडीएम आरपी शर्मा ने कहा कि नाबार्ड देशभर में 63 हजार सहकारी समितियों का कम्प्यूटराईजेशन कर रहा है। कोटा जिले की सभी सहकारी समितियां इस कार्य में शामिल है। में सहकारी समितियों के माध्यम 70-80 हजार किसानों को सस्ती दरों पर फसली ऋण उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा सहकारी समितियों और कॉपरेटिव बैंक के माध्यम से जिले गोदाम, ग्रेडिंग सेन्टर्स, ग्रामीण हाट बाजार की स्थापना कर भी रहा है।संबंधित कृषि से जुड़ी जानकारियों को साझा कर नवाचारी किसानों को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के अन्त में देवेश पांडा बाबूलाल धाकड़ ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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