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सीतामढ़ी में छठ पूजा की तैयारियां पूरीं, महापर्व के मधुर गीतों का शोर

सीतामढ़ी (बिहार)। लोक आस्था के महापर्व को लेकर वातावरण छठमय हो गया है। सूर्यदेव की पूजा की धूम व छठ के गीतों का शोर है। नहाय-खाय और खरना से निवृत हो व्रतियां शुक्रवार को अस्ताचलगामी आदित्य को अर्घ्य अर्पण करने की तैयारी में है। शनिवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। अपनी महिमा के कारण छठ की छटा मिथिला में निराली होती है। कई तरह की कथाएं प्रचलित हैं लेकिन आस्था लोगों की एक सी है। यह पर्व मुख्य रूप से सूर्य का पर्व है जो अनेक नामों से पुकारे जाते हैं, यथा डाला छठ, प्रतिहार व्रत, सूर्य षष्ठी आदि।

 प्रकृति देवी के एक प्रधान अंश को देव सेना कहते हैं, जो सबसे श्रेष्ठ मातृका मानी जाती है। प्रकृति की छटा अंश होने के कारण देवी का एक नाम षष्ठी भी है। ब्रह्म वैवर्त पुराण में चर्चा है कि षष्टांशा प्रकृतैर्या च सा च षष्ठी प्रकृर्तिता। पुराणों में भगवती षष्टी को शिशुओं की अधिष्ठात्री देवी के रूप में निरूपित किया गया है, जिनका काम बालकों को दीर्घायु बनाना, उनका रक्षण व भरण-पोषण करना देवी षष्ठी का गुण है। 

पुराणों में इन्हीं देवी का एक नाम कात्यायिनी भी मिलता है, जिनकी पूजा नवरात्र में षष्ठी तिथि को होती है षष्टम कात्यायनीति च। मैथिल वर्षकृत पद्धति में सूर्य षष्ठी की चर्चा प्रतिहार षष्ठी के नाम से की गई है। वस्तुत: प्रतिहार का अर्थ होता है जादू या चमत्कार अर्थात चमत्कारिक रूप से अभीष्टों को प्रदान करने वाला। व्रत के संबंध में एक कथा यह भी है जिसे नैमिषारण्य में शौनकादि मुनियों के पूछने पर श्री सूतजी लोककल्याणार्थ सूर्य षष्ठी व्रत का महात्म्य, विधि तथा कथा करने को कहा था। कथा के अनुसार एक राजा को कुष्ठ रोग हो गया। उन्होंने विद्वानों के आदेशानुसार इस व्रत को किया जिसके प्रताप से वे रोगमुक्त होकर राज्यारूढ़ हुए। व्रत की महिमा को देखते हुए काफी संख्या में लोग दिनकर-दीनानाथ की कृपा हेतु इसे करते हैं। जल में खड़ा होकर भगवान को अर्घ्य देने का विधान है। यही कारण है कि जहां नदी, पोखर या अन्य जलाशयों की कमी होती है, वहां लोग आंगन में गड्ढ़ा खोदकर उसमें पानी भरकर एक मात्र प्रत्यक्ष देवता सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसे छठ के एक मधुर गीत में भी सुना जा सकता है। अंगना में पोखरि खुनायब, ओहि पर अरघ देब...। 

दूसरी ओर, सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के लिए छठ घाटों पर साफ-सफाई और सजावट का काम चल रहा है। छठ पूजा समितियां दो दिनों से घाटों की तैयारी में दिन-रात एक किए हुए हैं।

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