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‘शिव’ के ‘राज’ में मंदिर में जूते पहनकर पुलिस का प्रवेश, पुजारी पर बरसाईं लाठियां

 रीवा। कोरोनावायरस महामारी पर नियंत्रण करने के मकसद से देश भर में लागू लाक डाउन की आड़ लेकर पुलिस का अमानवीय चेहरा संभागीय मुख्यालय में उजागर हुआ है। आस्था के मंदिर में जूते पहनकर रीवा शहर के सिविल लाइंस पुलिस का बल प्रवेश कर गया और मानवीयता की धज्जियां उड़ाते हुए मंदिर में हवन-पूजन कर रहे पुजारी पर लाठी और लात घूसों से हमला कर दिया।

गौरतलब है कि लाक डाउन की वजह से जिला प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी है। इसी का फायदा उठाकर पुलिस गुंडागर्दी करने पर उतारू हो गयी। मंदिर में पुजारी के मौजूद होने की सूचना मिलते ही सिविल लाइंस पुलिस टीआई राजकुमार मिश्रा अपने स्टाफ को लेकर माता रानी के मंदिर की तरफ रवाना हो गए। श्रीराम नवमी के अवसर पर मंदिर में हवन पूजन का विधान के साथ आयोजन किया गया था। सिविल लाइंस थाने की पुलिस अचानक मंदिर में पहुंची और टीआई राजकुमार मिश्रा ने गालियां बकते हुए पुजारी की लाठी छीनकर मंदिर परिसर में उन्हें जानवरों की तरह पीटना शुरू कर दिया। लालरंग के पुलिसिया जूते पहनकर मंदिर परिसर में टीआई राजकुमार मिश्रा ने प्रवेश करते हुए पूजारी पर लाठियों की बरसात शुरू कर दी। इतना ही नहीं पूजारी पर लात जूतों की मार शुरू कर दी। उस समय मंदिर में मौजूद भक्तजनों के बीच भागम भाग के हालात निर्मित हो गये। तकरीबन आधे घंटे तक मंदिर परिसर में सिविल लाइंस पुलिस तांडव करती रही। पूजारी गुहार लगाता रहा पर पुलिस को तरस नहीं आया। इस तरह के नजारे 22 मार्च से लगातार देश के विभिन्न राज्यों में देखने को मिल रहे हैं।  

नवरात्र में पहली बार पुलिस ने खोया आपा
साल भर में 18 दिन हिंदू समाज के लिए सबसे अधिक विशेष होते हैं। नवरात्र के हर एक दिन हर एक पल को लेकर जनमानस आस्था और भक्ति के बीच गोते लगाता है। नवरात्र के दिनों में जगत जननी की आस्था का असर लोगों के बीच हमेशा देखने को मिलता है। लाक डाउन की वजह से इस बार की नवरात्रि में भक्तों को मां शारदेय के पुण्य दर्शन प्रत्यक्ष रूप से पहली बार संभव नहीं हुए। नवरात्र के दौरान पुलिस का खौफनाक रुप श्रीराम नवमी के दिन देखने को मिला। माता के मंदिर में जूते पहनकर सिविल लाइंस पुलिस ने प्रवेश करके यह साबित कर दिया कि उसे लोगों की आस्था से कोई लेना.देना नहीं है। माता के मंदिर में पूजा करने वाले पुजारी के साथ सिविल लाइंस पुलिस का अमानवीय चेहरा देखने को मिला। 

सरकार ने साधा मौन, जिला प्रशासन ने मूंदी आंखें
कोरोनावायरस महामारी के नाम पर लागू लाक डाउन के बीच पुलिस का अमानवीय चेहरा उजागर होने लगा है। पुलिस मानवता को भूल चुकी हैए उसे ऐसा लगता है कि धारा 144 लागू होने के बाद उसे अतुलनीय शक्ति मिल गई है।  रीवा शहर में माता रानी के मंदिर में पूजारी के साथ सिविल लाइंस पुलिस ने जो किया, उसे जायज कहने की हिम्मत शायद ही कोई दिखा पाएगा। दिल्ली के तब्लीगी मरकज में कई दिन तक हजारों लोगों की मौजूदगी के बावजूद चुप्पी धारण करने वाली पुलिस ने मध्य प्रदेश में श्रद्धालु हिंदुओं के साथ अपना रौद्र रूप दिखा दिया ।इसहदय विदारक घटना लगातार सोशल मीडिया में वायरल हो रही है इसके बाद भी मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने कुछ एक्शन लेने के बजाय पूरी तरह से मौन साध रखा है। रीवा जिला प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम से अपनी आंखें मूंद रखी है।

पुलिस के दिग्गज आईजी चंचल शेखर और पुलिस अधीक्षक आबिद खान जैसे अफसरों ने सिविल लाइंस थाने के टीआई और पुलिस बल के अमानवीय कृत्य के मामले में जरा सी भी गंभीरता नहीं दिखाई है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया में पुलिस का कारनामा उजागर होने के बाद भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसी तरह से संज्ञान नहीं लिया है। अपने आप को किसान का बेटा कहने वाले हमारे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज में इतनी बड़ी घटना सामने आने के बाद भी टीआई और मौके पर मौजूद पुलिस के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई न होना उनके निरंकुश शासन की ओर संकेत कर रहा है।

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