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गाजियाबाद में प्रधानमंत्री और मुख्य मंत्री की हर घर बिजली योजना की धज्जियां उड़ाते हुए विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर की मनमानी और जिद की वजह से कई परिवारों में पिछले 6 माह से अंधेरा छाया हुआ है।

गाजियाबाद के गोविंदपुरम में स्थित अक्षय एनक्लेव कॉलोनी में 7 परिवारों अमित चौधरी, सत्यवीर सिंह, सुनीता यादव, जैद, रीता रावत, विमला रावत और श्रेया शंकर ने अपनी मेहनत की कमाई से अपने सपनों का घर बनाया जो कि दिसंबर 2023 में ही बनकर तैयार हो गए थे।फिर इन परिवारों ने अपने घरों में बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया परंतु विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर शिवम कुमार द्वारा इनके आवेदन यह कहकर निरस्त कर दिए गए कि यह क्षेत्र विद्युतीकृत नहीं है पहले इसका विद्युतीकरण होगा उसके बाद आपको कनेक्शन दिया जाएगा।जबकि इसी क्षेत्र में एक मकान बाद में बनकर तैयार हुआ है उसके आवेदन पर उस घर में बिजली संयोजन कर दिया गया है। इन परिवारों को विद्युतीकरण के नाम पर बिजली विभाग के कई ऑफिस में चक्कर काटने पड़े परंतु इन्हें सामूहिक आवेदन का फॉर्म नहीं प्रदान किया जाता था, कई महीने के बाद बड़ी मुश्किल से इन्हें सामूहिक आवेदन का फॉर्म प्रदान किया गया और आवेदन के लिए शुल्क ₹1180 जमा कराया गया उसके बाद फाइल सभी अधिकारियों के टेबलों पर घूमने लगी। जब फाइल जूनियर इंजीनियर के पास आई तो उसने साइट सर्वे रिपोर्ट में यह लिखकर भेज दिया कि इन परिवारों ने ट्रांसफार्मर रखने के लिए जगह नहीं प्रदान किया। जबकि इस क्षेत्र के लिए पहले से ही 63 केवीए का ट्रांसफार्मर लगा हुआ है और उसकी क्षमता वृद्धि 100 केवीए होनी है। अगर बिजली विभाग और जूनियर इंजीनियर अपने कार्य को जिम्मेदारी पूर्वक करते तो आज इन परिवारों को बिना बिजली के इस भीषण गर्मी में नरकीय जीवन नहीं जीना पड़ता।
बिजली एक मूलभूत जरूरत है इससे तो सरकार को वंचित नहीं करना चाहिए ,आज की दुनिया में अगर बिजली से वंचित किया जाएगा तो आम जनता किस तरह अपना जीवन यापन करेगी। योगी सरकार को इसके लिए हस्तक्षेप करना चाहिए। मैं मुख्यमंत्री जी से अनुरोध करूंगा की सहायता करें।

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