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दिशाहीन होती जा रही युवा पीढ़ी और बेबस माँ बाप।आधुनिक समाज की एक ख़ौफ़नाक सच्चाई....

डिजिटल क्रांति और मशीनीकरण के इस युग मे जहां एक तरफ आम आदमी का जीवन आसान हुआ है वही इसके दुष्प्रभाव भी बहुत मिले है।आधुनिकता की आड़ में भारत का युवा वर्ग बुरी तरह सामाजिक बुराइयो में लिप्त होता जा रहा है।आज का युवा अपने माँ बाप और गुरुजनों को अपना आदर्श मानने की बजाय फिल्मी हीरो और अन्य प्रसिद्ध लोगो को अपना आदर्श मानते है।यह एक कड़वी वास्तविकता है कि आज युवाओ का एक अधिकांश तबका आज शराब,शबाब,जुआ,सट्टा और विभिन्न तरह के नशे की गिरफ्त में जकड़ता जा रहा है और परिवारजन चाहते हुए भी कुछ नही कर पा रहे है।वह इनके आगे बेबस नजर आ रहे है।
कहने को तो आज का युवा डिजिटल हो चुका है लेकिन डिजिटल क्रांति के इस दौर में वह अपने संस्कार और मर्यादाओं को भूल चुका है। आम बोलचाल की भाषा मे गालियां और अभद्र भाषाशैली प्रयोग करने में आज का युवा गर्व महसूस करता है।आधुनिकता का यह असर केवल लड़को पर ही नही बल्कि लड़कियों पर भी बहुतायत में देखा जा रहा है।
अभिभावकों को अपने बच्चो को इस महामारी से बचाने के लिए विशेष ध्यान देना होगा।महंगे स्कूल,कॉलेज और कोचिंग में भेजकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री ना करे बल्कि अपने बच्चो की संगत,उनके व्यवहार,चाल चलन और उनकी हरकतों पर भी विशेष नजर बनाए रखे। गलत होने की सूरत में उसके साथ मैत्रीपूर्ण काउंसलिंग करे या किसी विशेषज्ञ काउंसेलर की मदद ले।
हालांकि हमारे देश मे बहुत सी संस्थाए और एनजीओ इस दिशा में बेहतरीन प्रयास कर भी रहे है लेकिन इस अभियान को एक क्रांति का रूप देना होगा और यह सब सरकार के सहयोग बिना असम्भव है। हमारी सरकारों को भी युवा वर्ग को मजबूत बनाने हेतु सभी स्कूल,कॉलेजों में संस्कारवान शिक्षा को बढ़ावा देते हुए योग,अध्यात्म,संस्कृति ,यौन शिक्षा,आदि जैसे विषयों को अनिवार्य करना चाहिए जिससे कि युवा पीढ़ी को भटकाव ना मिले।जुआ,नशा,सट्टा आदि विषयों पर सख्त कानून लाने होंगे और समाज मे व्यापक स्त्रबपर जागरूकता अभियान लाने होंगे ताकि भारत का युवा मजबूत बन सके और सशक्त भारत का सपना साकार हो सके।

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