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*प्रत्येक व्यक्ति की दो पत्निया हैं सुरुचि और सुनीति आचार्य डॉ. श्री मुकेश भारद्वाज*


*श्री बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड आयोजित श्रीमद् भागवत महायज्ञ के चतुर्थ दिवस के अवसर पर आचार्य श्री डॉ मुकेश भारद्वाज जी द्वारा ध्रुव चरित्र के दौरान राजा उत्तानपाद की दोनों पत्नियां सुरुचि और सुनीति की चरित्र के बारे में बताया और भागवत कथा की दौरान इस विषय को रखा कि प्रत्येक व्यक्ति की दो पत्नी है जनता की आचरण जिनका की आचरण अपने-अपने व्यक्तित्व के हिसाब से होता है इसी श्रृंखला में अंगदेश की कथा का व्याख्यान राजा पृथु के द्वारा पृथ्वी की उत्पत्ति, भगवान वाराह द्वारा पृथ्वी का उद्धार प्रचातेयो की उत्पत्ति उपदेश और नारद जी के द्वारा उनको दिव्यज्ञान का उपदेश इसी दौरान गोवर्धन ब्रज क्षेत्र के परम रसिक संत बाबा गया प्रसाद जी से गोवर्धन वालों का एक व्याख्यान श्री जगतगुरु निंबार्क पीठाधीश्वर श्रीजी बाबा के द्वारा ठाकुर जी के एक कार्यक्रम में बाबा को निमंत्रण और बाबा को अपने ठाकुर जी की याद में विरह करते देख देख बाबा गया प्रसाद जी और श्री जी महाराज के बीच का बड़ा ही मार्मिक और हृदय स्पर्शी संवाद प्रस्तुत किया जिस वहा बैठे सभी श्रद्धालुओं और और भागवत प्रेमियों की आंखें नम हो गई. इसी श्रृंखला में आगे भगवान के 24 अवतारों की व्याख्या जिसमें प्रमुख अवतार भगवान ऋषभदेव उनके पुत्र श्री भरत जी जिनके नाम से इस भारतवर्ष का नाम पड़ा और उन्होंने अपनी आसक्ति दिन में लगाने के कारण उनका जन्मदिन तीसरा जन्म लेने पर जड़ भरत के नाम से प्रसिद्ध हुए इसी श्रृंखला में आगे समुद्र मंथन की कथा भगवान शंकर के द्वारा विषपान और मंथन के द्वारा निकाली गई सभी अमूल्य और बहुमूल्य वस्तुओं का बंटवारा देवताओं और राक्षसों के बीच तथा समुद्र मंथन के द्वारा अमृत कलश की उत्पत्ति भगवान का मोहिनी अवतार और राहु और केतु की उत्पत्ति का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया इसी श्रृंखला में देवासुर संग्राम देवासुर संग्राम राजा बलि की मृत्यु तथा दैत्य गुरु श्री शुक्राचार्य द्वारा संजीवनी विद्या द्वारा राजा बलि को पुनर्जीवन और इस दौरान यज्ञ के समय भगवान बामन का आगमन भगवान वामन के द्वारा तीन गज जमीन मांगना और राजा बलि को सुतल लोक का राजा बनाना, भगवान नरसिंह का अवतार और हिरण्यकश्यप का उद्धार और प्रहलाद जी को प्रहलाद जी को ज्ञान उपदेश का वर्णन किया गया आगे की कथा में चक्रवर्ती सम्राट दशरथ जी के चार पुत्रों भगवान राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न के जन्म उनकी विद्या भगवान राम का जानकी जी संग विवाह और साथ ही तीनों भाइयों का विवाह का वर्णन भगवान राम का वन गमन हनुमान जी से मिलन और रावण का वध पुनः अयोध्या वापसी और राज्याभिषेक की कथा कही गई इसके आगे हमारे ठाकुर श्री कन्हैया की जन्म की कथा विस्तार पूर्वक सुनाई इसके दौरान कंस को अपनी बहन देवकी का विवाह वासुदेव के साथ और आकाशवाणी के द्वारा चेतावनी देना देवकी के गर्व से होने वाले आठवें पुत्र के द्वारा कंस की मृत्यु की चेतावनी वासुदेव जी के 6 पुत्रों को कंस के द्वारा जमीन पर पटक कर मार देना साथ में पुत्र भगवान बलराम जी को माता रोहिणी के गर्भ में स्थापित करना और आठवीं अवतार में भगवान कृष्ण का जन्म वासुदेव जी के द्वारा उनको गोकुल में पहुंचाना और वहां बाबा नंद के यशोदा जी के गर्भ से उत्पन्न हुई पुत्री को वापस लेकर आना और कंस को दिखाना कंस ने जैसे ही उसे पुत्री को जमीन पर पटका वह हाथ से छूटकर आकाश में चली गई और चेतावनी दी कि तेरा काल तो ब्रज गोकुल मैं जन्म ले चुका है आगे की कथा मैं महाराज जी ने नंद उत्सव की धूम के साथ ही चतुर्थ दिवस की चतुर्थ दिवस की कथा को विश्राम दिया.इस कथा का आयोजन कृष्ण स्वीट्स हाउस लुधियाना पंजाब पुणे हिमाचल के द्वारा श्री किशन देव भूमला, श्रीमती भजनो देवी, बलविंदर जी, बलवंत जी और समस्त भूमला परिवार और कृष्ण स्वीट्स परिवार द्वारा श्री बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड में किया जा रहा है और यजमान परिवार की तरफ से दोनों समय विशाल लंगर का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें की आने वाले सभी कथा प्रेमी और भगवान बद्रीनाथ जी के दर्शन करने वाले सभी भक्तगण प्रेम पूर्व प्रसाद का रहे हैं

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