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एक हाथ से देने का नाटक दूसरे हाथ से वापस न्यूनतम वेतन के नाम पर मजदूरों के साथ अधिकतम संभव क्रूर मजाक

बड़ी मुश्किल और खूब लंबे समय के इंतजार के बाद मध्य प्रदेश की मजदूरों के न्यूनतम वेतन में मामूली सी बढ़ोतरी की अधिसूचना 13 मार्च को जारी की गई और मालिकों के संगठन द्वारा महीने भर में ही हाई कोर्ट से स्थगनादेश लेकर रुकवा दी गई बढ़ोतरी के अधिसूचना के मुताबिक नई दरें अकुशल के लिए 11800 प्रतिमा अर्धकुशल के लिए 12796 प्रति माह कुशल के लिए 14519 रुपए प्रति माह तथा उच्च कुशल के लिए 16144 प्रतिमा थी और तालाब है की बढ़ोतरी के बाद भी जो मजदूरी तरह थे की गई थी विदेश धर्म के मजदूर संगठनों की मांग से आदि भी नहीं है
इन पुनरीक्षित डरो को 1 अप्रैल 2024 से लागू किया गया था कारखाना मालिकों के संगठन ने लागू होने के बाद याचिका दायर की और उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने 7 में 2024 स्थगन आदेश पारित कर दिया प्रक्रिया में मध्य प्रदेश सरकार और उसका श्रम विभाग हाथ पैर हाथ भर कर स्थानादेश आने का इंतजार करते रहा उसकी इतनी भी हिम्मत नहीं हुई की अदालत में जाकर यह कह सके कि स्थानक स्थगन आदेश का मतलब यथा स्थिति बनाए रखना है और यथा स्थिति यह है कि तरह एक महीने पहले लागू हो चुकी है हालांकि हाई कोर्ट को भी प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुरूप श्रमिकों के पक्ष को सुनना चाहिए था
सीटू प्रदेश महासचिव श्री प्रमोद प्रधान ने इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार के मालिक पर्स दृष्टिकोण और कानूनी मुकाबले में अपने गए लचर रवैया को जिम्मेदार बताया है
मालिक एक हास्यास्पद आधार पर स्थगन लेकर आए हैं उनका कहना है कि बड़े शहरों के अलग और अन्य क्षेत्र के लिए अलग न्यूनतम वेतन निर्धारित किए जाने चाहिए उनका यह दावा न सिर्फ बेतुका है बल्कि न्यूनतम वेतन कानून की अवधारणा और देशभर में प्रचलित पद्धति में भी अलग है श्रमिक संगठन इसके विरुद्ध संघर्ष की तैयारी में जुड़ गए हैं सीटू ने 15 मई को विस्तारित पदाधिकारी मंडल बैठक कर कानूनी लड़ाई में भी मजदूरों की तरफ से हस्तक्षेप कर्ता बनने का फैसला किया है

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