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अध्यात्मिक गुरुओं की महत्ता व अस्तित्व महर्षि वेद व्यास से, आदि गुरु महर्षि वेद व्यास प्रादुर्भाव समारोह में ब्रज मण्डल के 7 अध्यात्मिक गुरुओं की किया " अध्यात्म भूषण " की उपाधि से अलंकृत व्यास जी की पौराणिक तप स्थली पर*

श्रीमद्भागवत कथा आयोजन समिति विद्वत समाज ब्रजमण्डल के तत्वावधान मथुरापुरी में कृष्ण गंगा घाट स्थित वेद व्यासजी ( कृष्ण द्वैपायन) की पौराणिक तपस्थली पर आदि गुरु महर्षि वेद व्यास प्रादुर्भाव समारोह विगत अनेक वर्षों की भाँति परंपरागत रूप से आयोजित किया गया। सर्व प्रथम उपस्थित विद्वतजनों, पांडित्यजनों ने मंत्रोच्चार व वेदों की ऋचाओं के मध्य आदि गुरु का चरणाभिषेक, कर पूजन अर्चन समिति संस्थापक पंडित अमित भारद्वाज के निर्देशन में व अध्यक्ष पं. शशांक पाठक के आचार्यत्व में वैदिक रीति से किया। मंगल दीप प्रज्ज्वलित कर व्यासजी के जीवन दर्शन पर विद्वत संगोष्ठी हुयी। जिसमें आचार्य रमाकांत गोस्वामी ने व्यास जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विचार प्रकट करते हुए कहा कि अध्यात्मिक गुरुजनों की महत्ता व अस्तित्व वेद व्यास से हैं। आचार्य लालजीभाई शास्त्री ने कहा वह सत्य सनातन धर्म व संस्कृति के पुरोधा हैं। पूर्ण प्रकाश कौशिक महाराज ने कहा कि उनके द्वारा रचित वेद, पुराण, उपनिषद, शास्त्र, संहिता धर्म गुरुओं का मार्ग दर्शन व सनातन संस्कृति व धर्म को दिशा प्रदान कर रहे हैं। संचालन करते हुए समिति संस्थापक व समारोह के सूत्रधार पं. अमित भारद्वाज ने बताया कि वराह पुराण, वायु पुराण में वर्णित आदि गुरु कृष्ण द्वैपायन व्यासजी की तप स्थली पर पूजन अर्चन के उपरांत गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने शिष्यों से गुरु के रूप में अपना पूजन कराते हैं। इसी कारण यह समारोह पूर्व दिवस पर आयोजित होता है।इस अवसर पर स्मारक समिति के मंत्री योगेश आवा व संयोजक आचार्य शिवओम गौड़ शास्त्रीने विद्वानों का अभिनंदन किया। समिति द्वारा 7 विद्वानों को अध्यात्म भूषण की उपाधि से अलंकृत किया । जिसमें गोकुल से सुरेश बाबा महाराज, गोवर्धन से दीनबंधु दास महाराज, मथुरा से याज्ञिक परमेश्वर दत्त आचार्य, वृंदावन से महा महामंडलेश्वर नवलगिरी महाराज, पंडित विनय त्रिपाठीआचार्य राजू भैया महाराज, आचार्य राम विलास चतुर्वेदी थे। समापन पर 108 दीप ज्योतियों सेमहाआरती की गयी। महाप्रसाद के साथ समारोह का समापन हुआ। समारोह की अध्यक्षता घनश्याम हरियाणा ने एवं आभार व्यक्त समिति के मंत्री हर्षवर्धन शास्त्री ने किया। गोष्ठी को संबोधित करने वालों में प्रमुख रूप से पूर्ण प्रकाश कौशिक, लक्ष्मीकांत शास्त्री, आचार्य मुरारी लाल उपाध्याय, यज्ञ दत्त शास्त्री, श्रीकांत भंडारी, सत्य प्रकाश पांडेय, हरिशंकर शास्त्री, श्रीकृष्ण शास्त्री, मनोज मिश्र, गोवर्धन दास, आदि थे।

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