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बिस्मिल्लाह ख़ां को तो भारत रत्न मिल गया लेकिन उनके पुत्र रत्न उनके उचित सम्मान नहीं दिला सके - बेताब अहमद बेताब

बेताब अहमद बेताब/रोहतास
21 अगस्त 2006 को बिस्मिल्लाह ख़ां 90 वर्ष के उम्र में इस दुनिया से विदा हुए। आज इनका परिवार के संपति के नाम पर आपस में लड़ रहा है। बिस्मिल्लाह खां लंबी चौड़ी संपत्ति छोड़कर नहीं गये थे। सिर्फ मकान छोड़कर गये है उस मकान की लिए उनके परिवार आपस लड़ रहे हैं। बिस्मिल्लाह खान को 1947 में आजादी के पूर्व संध्या पर और 1950 के पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर शहनाई बजाने का गौरव प्राप्त हुआ था। लेकिन आज उनकी गौरवशाली पहचान पर उनके ही संतानों ने हथोड़ा चला दिया है। उक्त बातें सासाराम के सहाजुमा मोहल्ला के निजी होटल में सासाराम मुस्लिम हलालखोर पंचायत के बैनर तले बिस्मिल्लाह खां की 18वीं पुण्य तिथि के अवसर पर दलित मुस्लिम हलालखोर मुहिम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बेताब अहमद बेताब ने कही।

बेताब अहमद बेताब ने कही कि वाराणसी के जिस घर में बिस्मिल्लाह खान अपने शहनाई वादन को तराशते थे आज उसी घर को तोड़ कर वहां शॉपिंग कॉन्प्लेक्स बनाने की कोशिश हो रही है और ये काम कोई पराया नहीं बल्कि उनके अपने पोते कर रहे हैं। बिस्मिल्लाह खान साहब हम लोगों के प्रशंसक और प्रेरणा स्रोत है हम चाहते हैं कि इस घर को म्युजिएम में बदल
दिया जाये। क्योंकि यह घर पूरे भारत में ही नहीं पूरे दुनिया को बिस्मिल्लाह खां साहब को याद दिलाता है।

बेताब अहमद बेताब ने कही कि शिकायत के बाद जब तक वाराणसी प्रशासन इस घर को बचाता तब तक बिस्मिल्लाह खां साहब का घर चौड़ा जा चुका था। जहां बिस्मिल्लाह ख़ां साहब हर रोज रियाज किया करते थे। आज बिस्मिल्लाह खान के जाने के बाद ही यादों तक की उनकी घरों में जगह नहीं मिल पा रही है यानी कि बिस्मिल्लाह ख़ां साहब को तो भारत रत्न मिल गया लेकिन उनके पुत्र रत्न उनके उचित सम्मान नहीं दिला सके।

बिस्मिल्लाह खां के पुण्य तिथि के अवसर पर सासाराम लोकसभा के सांसद मनोज कुमार, सासाराम के विधायक राजेश कुमार, सासाराम के उप मेयर सत्यवंती देवी, डॉ. नूर हसन आजाद, मोहम्मद मुन्ना हलालखोर बीएसएनल, अलीमुद्दीन इदरीसी, तौकीर मंसूरी, नौशाद आलम, शमी अहमद, मोहम्मद अयूबएवं सैकड़ो लोगों ने अपने-अपने विचार रखें।

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