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श्रीरामलला मंदिर निर्माण के लिए स्वयंसेवकों ने सनातनियों से किया निधि संग्रह


जयनगर(मधुबनी)। सनातन धर्म के आस्था और विश्वास के केंद्र अयोध्या धाम मे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र निर्माण निर्माण हेतु स्वयंसेवकों ने नगर में निधि संग्रह किया। आस्था के रंग में सराबोर स्वयंसेवकों ने श्रीराम भक्तों से स्वेच्छापूर्वक समर्पित कर रहे धन को संग्रह किया और श्रीराम तीर्थस्थान क्षेत्र समिति द्वारा जारी रसीद सौंपा। निधि संग्रह अभियान के क्रम में रामभक्त स्वयंसेवक "जय श्रीराम" और "रामलला हम आ रहे हैं, मंदिर वहीं बना रहे हैं जय श्रीराम" का ध्वनिघोष कर रहे थे।  

श्रीराम मंदिर निर्माण में अपना योगदान देने के लिए सनातन धर्म के श्रद्धालुओं में बहुत उत्साह का माहौल है और श्रीराम के इस पुनीत कार्य में सभी रामभक्त सनातनी अपने इच्छानुसार योगदान दे रहे हैं। बिहार के मिथिला क्षेत्र जो कि माँ जानकी की भूमि है, उस भूमि से कुछ विशेष ही उत्साह दिख रहा है और लोग आगे आकर इस युगान्तकारी कार्य में सहभागी बन रहे हैं। इसी क्रम में मधुबनी जिला के जयनगर में भी स्थानीय रामभक्तों ने निधि समर्पित करने वाले श्रद्धालुओं से निधि संग्रह किया।

इस निधि संग्रह अभियान में बच्चे, बुजुर्ग, महिला समेत युवा भी उत्साह से सम्मिलित हो रहे हैं। संग्रह अभियान में शामिल और महात्मा गांधी उत्तर बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी से पीएचडी कर रहे रोहित गुप्ता बताते हैं कि श्रीराम लला का मंदिर उसी स्थान पर बनना कोई साधारण बात नहीं है। यह 500 वर्षों के निरंतर सँघर्ष और 78 युद्धों के विजय स्वरूप हमें हमारे आराध्य का जन्मस्थान हमें प्राप्त हुआ है। इसके लिए 25 से अधिक पीढ़ियों ने संघर्ष किया और रेगिस्तान के विदेशी आक्रांता के क्रूरता से इस स्थल को मुक्त कराया।

यह समय सदियों बाद आया है और हम सौभाग्यशाली हैं कि 5 शताब्दी बाद इस क्षण का गवाह बन रहे हैं। इस गौरवपूर्ण पल के लिए हमारे पूर्वजों ने पीढ़ियों से संघर्ष किया और उन सबका सम्मिलित प्रयास से आज हमारी पीढ़ी को यह गौरवपूर्ण क्षण को साक्षात दर्शन करने का अवसर मिल सका है। यह साधारण पल नहीं है। यह ऐतिहासिक समय है और जब भी सनातन धर्म के शौर्य की बात होगी, संघर्ष की बात लिखी-कही जायेगी तो यह घटनाक्रम हमारे गौरव में शामिल होगा।

श्री रोहित ने यह भी कहा कि साहित्य में नोबेल पुरस्कार विजेता दिवंगत विद्याधर सूरज नॉयपाल ने भी श्रीराम जन्मभूमि संघर्ष को सनातन गौरव बताए थे।

इस अभियान में सुधीर खर्गा, अरविंद तिवारी, दिनेश पूर्वे, रोहित गुप्ता, राजेश गुप्ता, धीरेंद्र झा, सनातन कुमार सनातनी, सुभाष सनातनी इत्यादि ने धर्मसेवा किया।

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