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*प्लाजा सिनेमा पर हथौड़ा* अजमेर

👉 *प्लाजा सिनेमा पर हथौड़ा*
👉 *अब बस यादें* *शील गहलोत*
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हाल ही 7 सितम्बर गणेश चतुर्थी के दिन अजमेर शहर के एक और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर प्लाज़ा टाकीज पर हथौड़ा चल गया। सन् 1934 से लेकर अब तक एक से बढ़ कर एक ख़ूबसूरत यादों को संजोए रखने वाला यह सिनेमा घर सन् 2005 के बाद से थकी सांसें ले रहा था जो 2014 में इस सिनेमा हॉल के प्रबंधक मंघाराम बुलानी के निधन के बाद ही लगभग मरणासन्न अवस्था में आ गया और अब ठीक दस साल बाद अब इसका वजूद जमींदोज होना शुरू हो गया। जयपुर के गोलछा परिवार ने इसे लीज पर लेकर शंकर पैलेस नाम हटा कर प्लाजा टाकीज नाम दिया। उनके बाद 1970 में मंघाराम बुलानी ने इसे ले लिया। उन्होंने इस सिनेमा घर में अपने जमाने की सुपर-डुपर हिट फिल्म जय संतोषी माता लगाई जिसने मंघाराम बुलानी को इतना कमा कर दिया कि वे अपने दूध के धंधे से निकल कर सिनेमा उद्योग में लग गए और देखते-ही-देखते इस शहर की अरबपति हस्ती बन गए। लोग सही कहते हैं कि लक्ष्मी जिसके भाग्य में आती है, उसी के साथ चली जाती है। यह मैने मंघाराम बुलानी के साथ होते हुए देखा। वो प्यार से मुझे *लाला अशोक* कहते थे। उनको लाइलाज़ बीमारी होने के साथ ही वे ज्यों-ज्यों मौत के करीब जा रहे थे, त्यों-त्यों लक्ष्मी भी प्लाज़ा सिनेमा छोड़ कर निकलती गई। प्लाजा सिनेमा में सरवर सिद्धिकी, नेमीचंद अजमेरा, किशन बिजली वाला मंघाराम बुलानी के साथ एक परिवार की तरह जुड़े और कड़ी मेहनत करके सभी ने एक से बढ़ कर एक शानदार फिल्में चलाईं। *हम आपके हैं कौन* फिल्म ने इसी सिनेमा घर में लगातार *43 सप्ताह* चल कर ऐसा रिकार्ड बनाया जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ पाया। तब शहर में प्रभात टाकीज, अजंता टाकीज, श्री टाकीज और मृदंग टाकीज़ में अधिकांश फिल्में ऐसी लगीं जिन्होंने यहीं पर सिल्वर जुबली मनाई। इन सभी में प्रतियोगिता रहती थी कि कौन सबसे ज्यादा सुपर हिट फिल्में चलाता है। देश भर में सिंगल स्क्रीन सिनेमा खत्म होने के साथ ही पूरे राजस्थान सहित अजमेर के भी सिनेमा घर एक-एक करके उजड़ते चले गए।अब प्लाजा सिनेमा हॉल बिक गया और उस पर हथौड़ा चल गया। जैसे और सिनेमा घरों का स्टाफ उजड़ा वैसे ही इस सिनेमा घर का स्टाफ भी अब.....। इसी सिनेमा घर में अपने जमाने के *मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक एन ए अंसारी, सुनील दत्त, संजय दत्त, फिल्मकार के सी बोकाडिया, राजस्थानी फिल्मों की नायिका नीलू, नच बलिए फेम अरविन्द, फिल्म एक्ट्रेस फराह* जैसी ढेरों हस्तियां अपने-अपने दौर में आईं। प्लाजा सिनेमा से पहले 1929 में *न्यू मैजिस्टिक* सिनेमा अस्तित्व में आया। इसमें पहली फिल्म *आलम आरा* लगी थी। 7 मई 2000 को इसमें आग लग गई और 28 फ़रवरी 2015 को यह बंद हो गया। प्रभात टाकीज, इसे सेठ राम रिछपाल सिरिया और गणेशीमल बोहरा ने 28 मई 1947 में शुरू किया। 1962 में *श्री टाकीज* को जोधपुर के सेठ गोविंद सिंह मेहता ने शाह रुप नारायण को लीज पर दिया। इसमें पहली फिल्म *सेहरा* लगी थी। 1964 में बालाबक्ष तामरा ने *अजंता टाकीज* को फिल्म *दूर की आवाज़* से शुरू किया था। 1971 में *मृदंग टाकीज़* को रुप नारायण शाह ने फिल्म *बुड्ढा मिल गया* से शुरू किया था। अजमेर के ये सब बहुत पुराने सिनेमा घर हैं जिनमें से अब मात्र मृदंग टाकीज़ बचा है, शेष सभी उजड़ गए। सही कहा था बी आर चोपड़ा ने फिल्म वक्त में।👉
वक्त की पाबंद हैं आती-जाती रौनकें,...।
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