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भारतीय रेलवे की करवी सच्चाई?

पूर्णियां,बिहार:-
आजादी के 76 साल बाद भी भारतीय रेल की स्तिथि में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल पा रहा है। लोग आज भी धक्के मुक्के खा के रेल में सफर करने को मजबूर है। चाहे वो लंबी दूरी की ट्रेन हो या फिर लोकल एक्प्रेस हो पैसेंजर। हाई स्पीड ट्रेन हो या फिर मीडियम स्पीड की सब की हालत एक जैसी है। एसी कोच हो या स्लीपर या फिर जनरल डब्बा यात्री का कोचम कोच पर क्या ही कहा जाए , एक एक बित्ते सीट की लड़ाई देखने लायक होता है। बात तो लोग ऐसे करेंगे जैसे कोई कलेक्टर के खानदान का हो पर हरकत बच्चो की तरह । सरकार भी क्या करे ,इस बढ़ती जनसंख्या को लेकर कितनी एक ही रूट में कितनी ट्रेन बढ़ा दे । सरकार भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश करती है फिर भी ट्रेन की हालात जस का तस बना हुआ है। ये बात सिर्फ बिहार का नही देश के लगभग सभी राज्यों का है । हां एक बात तो सही हुआ है खासकर बिहार में लोग अब टिकट लेकर जरूर यात्रा करते है । बिना टिकट लेकर यात्रा करने वालो को संख्या शायद 5 से 10 प्रतिशत रह गया है । इससे रेल को फायदा भी पहुंचा है । लेकिन रेल मंत्रालय को भी कोई ऐसा मास्टर प्लान बनाना चाहिए ताकि लोग परेशान ना हो । भारतीय रेलवे में बढ़ती पैसेंजर और धक्का मुक्की से आए दिन दुर्घटना की भी खबर आते रहती है । अब रहा ट्रेन में खाने पीने की बात तो सरकार को इस पर भी नजर रखनी चाहिए। सही और शुद्ध खाने की व्यवस्था और सही दाम में बिल के साथ मिले । पेंट्री में भी गजब का भ्रटाचार और पेंट्री स्टाफ की मनमानी देखने को मिलता है ।

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