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गांवों का दातागंज तहसील से संपर्क टूटा, 20 हजार लोग घरों में कैद,

बाढ़ के कारण जमीन का कटान हो रहा है। फसल भी पूरी तरह नष्ट हो गई है। बाढ़ में फंसे लोगों को न तो राहत सामग्री मुहैया कराई गई है और न ही अधिकारी ही गांव तक पहुंच सके हैं। जलस्तर अधिक होने से नाव से सफर करने में भी लोगों को डर लग रहा है। प्रशासनिक अधिकारी राहत सामग्री वितरण करने की बात तो कह रहे हैं। लेकिन, हालात कुछ और ही हैं। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

हालात यह है कि अकट समेत जरतोली, सकतपुर, सिमरिया, नवादा बदन, देवचरी, हर्रामपुर, शेरपुर, गढि़या पैगंबरपुर, मेढ़ा गांव में पानी भरा हुआ है। अकट के अमर सिंह और भूरे के मकान की दीवारें अचानक भरभराकर गिर गईं। इससे पानी घर के अंदर घुस गया। अब अन्य घरों से बाढ़ का पानी टकरा रहा है। ऐसे में उनको भी खतरा बना हुआ है।

ऐसे में शिक्षक स्कूल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह ऐसे स्कूलों का चयन करें, जहां पर शिक्षक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन स्कूलों के शिक्षकों को पास के गांव जहां पर वह आसानी से पहुंच जाएं, उन विद्यालयों में भेजा जाए।

दातागंज क्षेत्र में कुछ समय पहले बाढ़ आई से धान की पौध पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। बाढ़ का पानी जाने के बाद में जैसे-तैसे ग्रामीणों को अपने जीवन-यापन को जारी रखने के लिए दोबारा से बाजरा, तिल, उर्दू आदि खरीफ की फसल बोई थी। चूंकि अब खरीफ की बोआई का सीजन निकल गया है। इसी बीच में दोबारा से बाढ़ आ गई और किसानों की अब फिर से फसल नष्ट हो गई है।


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