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कोटा में चल रहे राष्ट्रीय दशहरा मेले में दुकानों के आवंटन में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते कोटा राजस्थान

कोटा में चल रहे राष्ट्रीय दशहरा मेले में दुकानों के आवंटन में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए एक दंपति ने आत्महत्या की चेतावनी दी है यह दंपति पिछले 6 दिनों से नगर निगम के चक्कर काट रहा है लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिला। उसका कहना है कि उन्होंने हर साल मेले में खाने पीने की दुकान लगाई है लेकिन इस साल उसके साथ अन्याय किया जा रहा पीड़ित दंपति ने बताया कि वह साल 2015 से हर साल मेले में दुकान लगाते आ रहे हैं लेकिन इस साल उन्हें दुकानों के आवंटन में कोई सूचना नहीं मिली अब यह है कि नगर निगम के अधिकारियों ने मनमाने तरीके से दुकानों का आवंटन किया और उन्हें नजर अंदाज कर दिया। हम पिछले 6 साल से हर साल मेले में दुकान लगाते आ रहे हैं इस बार अचानक हमें दुकान नहीं दी गई, नगर निगम के अधिकारियों से कई बार बात कर ने की कोशिश की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही हमें ऐसा लग रहा है कि हमारे साथ अन्याय हो रहा है अब हमारे पास आत्महत्या करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।
दंपति के साथ उनके तीन छोटे बच्चे भी हैं जो पिछले 6 दिनों से अपने माता-पिता के साथ नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं इस दंपति ने कलेक्ट पहुंचकर आत्महत्या की चेतावनी दी है और दुकानों के आवंटन में इंसाफ की मांग की है।
हालांकि नगर निगम की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन दंपति का आरोप है कि अधिकारियों ने जानबूझकर उन्हें आवेदन को नजरअंदाज किया है।
अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित दंपति को न्याय दिलाने के लिए क्या कार्रवाई होती है। राष्ट्रीय दशहरा मेला कोटा का सबसे बड़ा त्यौहार होता है और इस तरह के आरोप उसकी प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
यहां सवाल उठता है कि क्या मेले में दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया वास्तव में पारदर्शी है या फिर इसमें भ्रष्टाचार का काला साया छाया हुआ है इसकी जांच उच्च स्तरीय एजेंसियों से होनी चाहिए, कहीं यह भ्रष्टाचार शहर के प्रतिष्ठित माननीयों को ना लें डूबे। अब यह देखना बाकी है कि इस दंपति की आवाज कब और कैसे सुनी जाएगी

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