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तुकारिया परिवार लाबरिया धार द्वारा पितृ मोक्ष भागवत कथा चतुर्थ दिवस श्री कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया

श्रीमद् भागवत कथा - चतुर्थ दिवस - लाबरिया आपके बुरे समय में सिर्फ आपका धर्म काम आता है । " " जो शिक्षा हमें अधूरा ज्ञान दे वो शिक्षा हमारे किसी काम की नहीं " तुकारिया परिवार के तत्वाधान में पितृ मोक्ष भागवत कथा 5 नवंबर से 11नवंबर प्रतिदिन गांव लाबरिया में पंडित पूज्य श्री केशव जी चतुर्वेदी जी महाराज के मुखारबिंद से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है । कथा के चतुर्थ दिवस पर महाराज श्री ने प्रभू के वामन अवतार के वृतांत का विस्तार पूर्वक वर्णन भक्तों को करवाया एवं कृष्ण जन्मोत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया प्रभु कथा के चतुर्थ दिवस पर सैकड़ो की संख्या में भक्तों ने महाराज श्रीमुख से कथा का श्रवण किया । भागवत कथा के चतुर्थ दिवस की शुरुआत पितृ मोक्षतर्पण भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई । पूज्य गुरुदेव ने युवाओं को कथा सुनने के लिए प्रेरित किया है उसके लिए तुकारिया परिवार महाराज श्री का अभिनंदन करता है । पूज्य गुरुदेव ने कथा की शुरुआत करते हुए महाराज श्री ने बताया की जो शिक्षा हमें अधूरा ज्ञान दे वो शिक्षा हमारे किसी काम की नहीं है । महाराज श्री ने बताया की हमारी भारतीय संस्कृति विश्व भर में सबसे समृद्ध है और हमें इस संस्कृति का ज्ञान और संस्कार अपने बच्चों को भी देना चाहिए क्यूंकि आज कल जिस तरह पाश्चात्य संस्कृति ने युवाओ को घेरा हुआ है उस वजह से हमारे युवाओ में संस्कार कही खो से रहे है । साथ ही बताया की जब आपका बुरा समय आता है तो तब ना आपकी ताकत काम आती है न आपके रिश्तेदार काम आते है , उस समय सिर्फ आपका धर्म काम आता है इसलिए हमें हमेशा भगवान् में विश्वास रखना चाहिए और उन्हें ही अपना आराध्य मान कर नित्य उनकी भक्ति करनी चाहिए । क्यूंकि अगर हम अपने सद्गुरु भगवान् के चरणों को पकडे रहेंगे तो हमारे जीवन का कल्याण होना निश्चित है । महाराज श्री ने कहा की आज कलयुग का मानव अपनी प्रशंसा सुन का आदि है और जहां उसकी प्रशंसा न हो वहां वो व्यक्ति जाना भी पसंद नहीं करता लेकिन कलयुग का मानव ये नहीं जानता की वो अपने इस अभिमान के चक्कर में अपना लोक - परलोक दोनों गवां देता है पूज्य गुरुदेव केशव जी चतुर्वेदी जी ने श्रीमद्भागवत कथा चतुर्थ दिवस के प्रसंग का वृतांत सुनाते हुए बताया कि वामन अवतार भगवान विष्णु के दशावतारो में पांचवा अवतार और मानव रूप में अवतार था । जिसमें भगवान विष्णु ने एक वामन के रूप में इंद्र की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया । वामन अवतार की कहानी असुर राजा महाबली से प्रारम्भ होती है । महाबली प्रहलाद का पौत्र और विरोचना का पुत्र था । महाबली एक महान शासक था जिसे उसकी प्रजा बहुत स्नेह करती थी । महाबली ने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी जिसके फलस्वरूप भगवान ब्रह्मा ने प्रकट होकर वरदान मांगने को कहा । बाली ने भगवान ब्रह्मा वरदान मांगा की मुझे इंद्र के बराबर शक्ति चाहिए और मुझे युद्ध में कोई पराजित ना कर सके । " भगवान ब्रह्मा ने उसे वरदान दे दिया । बाली ने इंद्रदेव को पराजित कर इंद्रलोक पर कब्जा कर लिया । एक दिन गुरु शुक्राचार्य ने बाली से कहा अगर तुम सदैव के लिए तीनो लोकों के स्वामी रहना चाहते हो तो तुम्हारे जैसे राजा को अश्वमेध यज्ञ अवश्य करना चाहिए । बाली अपने गुरु की आज्ञा मानते हुए यज्ञ की तैयारी में लग गया । इंद्रदेव देवमाता अदिति के पास सहायता के लिए गए और उन्हें सारी बात बताई । के देवमाता ने विष्णु भगवान से वरदान माँगा कि वे उनके पुत्र रूप में धरती पर जन्म लेकर बाली का विनाश करें । जल्द ही अदिति और ऋषि कश्यप के यहाँ एक सुंदर बौने पुत्र ने जन्म लिया । पांच वर्ष का होते ही वामन का जनेऊ समारोह आयोजित कर उसे गुरुकुल भेज दिया । इस दौरान महाबली ने 100 में से 99 अश्वमेध यज्ञ पुरे कर लिए थे । अंतिम अश्वमेध यज्ञ समाप्त होने ही वाला था कि तभी दरबार में दिव्य बालक वामन पहुँच गया । महाबली ने कहा कि आज वो किसी भी व्यक्ति को कोई भी दक्षिणा दे सकता है । महाबली उस बालक व्यक्ति को कोई भी दक्षिणा दे सकता है । महाबली उस बालक के पास गया और स्नेह से कहा " आप अपनी इच्छा बताइये । उस बालक ने महाबली से कहा " मुझे केवल तीन पग जमीन चाहिए जिसे मैं अपने पैरों से नाप सकूं ” । महाबली ने हँसते हुए कहा " केवल तीन पग जमीन चाहिए , मैं तुमको दूँगा । " जैसे ही महाबली ने अपने मुँह से ये शब्द निकाले वामन का आकार धीरे धीरे बढ़ता गया । वो बालक इतना बढ़ा हो गया कि बाली केवल उसके पैरों को देख सकता था । वामन आकार में इतना बढ़ा था कि धरती को उसने अपने एक पग में माप लिया । दुसरे पग में उस दिव्य बालक ने पूरा आकाश नाप लिया । अब उस बालक ने महाबली को बुलाया और कहा मैंने अपने दो पगों में धरती और आकाश को नाप लिया है । अब मुझे अपना तीसरा कदम रखने के लिए कोई जगह नहीं बची , तुम बताओ मैं अपना तीसरा कदम कहाँ रखूँ । महाबली ने उस बालक से कहा " प्रभु , मैं वचन तोड़ने वालों में से नहीं हूँ आप तीसरा कदम मेरे शीश पर रखिये व्रतांत बताया । " भगवान विष्णु ने भी मुस्कुराते हुए अपना तीसरा कदम महाबली के सिर पर रख दिया । वामन के तीसरे कदम की शक्ति से महाबली पाताल लोक में चला गया । अब महाबली का तीनो लोकों से वैभव समाप्त हो गया और सदैव पाताल लोक में रह गया । इंद्रदेव और अन्य देवताओं ने भगवान विष्णु के इस अवतार की प्रशंशा की और अपना साम्राज्य दिलाने के लिए धन्यवाद दिया । इसके बाद पूज्य महाराज श्री ने भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का सुंदर वर्णन श्रवण कराया । सभी भक्तों ने श्री कृष्ण जन्मोत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया । कथा का आयोजन तुकारिया परिवार द्वारा किया जा रहा है । कथा पंडाल में भागवत कथा के यजमानों सहित कई गणमान्य अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिती दर्ज करवाई |

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