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आज के दिन 1921 को उन्डवा गांव में 123 किसान हुए थे गिरिफ़्तार - ओ०पी० यादव

ओ०पी० यादव की दादी, मां एवं पिता सभी थे स्वतंत्रता सेनानी ।
स्वतंत्रता सेनानी को मिलने वाले किसी लाभ के लिए कभी आवेदन नहीं किया ।

रायबरेली 05 जनवरी 2025 !
किसान आन्दोलन में शामिल होने के लिए 06 जनवरी 1921 को जगतपुर थाना क्षेत्र के उडवा ग्राम में किसान इकट्ठा हुए और रायबरेली के लिए कूच करना चाह रह थे तभी अंग्रेजों के चाटुकार सरदार वीर पाल सिंह के रिश्तेदार सरकार निहाल सिंह ने किसानों के ऊपर फ़सल नष्ट करने एवं जिल्ला फूंकने का झूठा मुक़दमा लिखाकर 123 किसानों की गिरफ़्तारी करायी जिससे कि वे किसान आंदोलन में शामिल न हो सके, 07 जनवरी 1921 को ज़िला मुख्यालय में किसान आंदोलन प्रस्तावित था जिसमें किसान नेताओं के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पं० जवाहर लाल नेहरू एवं पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी को शामिल होना था इस आंदोलन को कमज़ोर करने के लिए जगह-जगह पर आंदोलन कारियों को ब्रिटिश हुकूमत के इशारे पर पुलिस गिरफ़्तार कर रही थी इसी क्रम में उड़वा में जिन किसानों की गिरफ़्तारी हुयी उसमें महिलायें एवं बच्चे भी शामिल थे इसमें सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ओ०पी० यादव की दादी श्रीमती इन्दिरा यादव, बाबा सद्धू प्रसाद यादव, 09 वर्षीय पिता बद्री प्रसाद यादव शामिल थे, 07 जनवरी 1921 को मुंशीगंज गोली काण्ड में ओ०पी० यादव के नाना महावीर यादव घायल हुए थे इसी आंदोलन के बाद ओ०पी० यादव की मां श्रीमती उमराई यादव वानर सेना में शामिल होकर सत्याग्रह किया और जेल की यात्रायें की बाद में उमराई यादव व बद्री प्रसाद यादव का विवाह हो गया पूरे परिवार ने स्वतंत्रता सेनानी को मिलने वाली किसी भी लाभ के लिए कभी आवेदन नहीं किया, इस परिवार में ओ०पी० यादव के बडे भाई राम नरेश यादव जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक के पद से रिटायर होकर घर पर रह रहे हैं, एक भाई राम बहादुर यादव आईटीआई से इंजीनियर पद से रिटायर हुए है जिनका स्वर्गवास हो चुका है, एक बहन राज कुमारी यादव जो गृहणी है। 06 जनवरी 1921 को उडवा गांव में किसान आंदोलन की जानकारी मिलने पर तत्कालीन ज़िलाधिकारी उडवा गांव जा रहे थे तभी नवाबगंज के पास ख़बर मिली कि चन्दनिहा गांव में किसान आंदोलन काफ़ी उग्र हो गया है तो वे चन्दनिहा चले गये ब्रिटिश हुकूमत की लाख कोशिशों के बावजूद 07 जनवरी 1921 को हज़ारों किसान मुंशीगंज पहुंच गये थे जहां पर ब्रिटिश हुकूमत के नक्कारेपन के कारण व सरदार वीरपाल सिंह के कारण सैकडों किसान शहीद हो गये किसानों के रक्त से सई का पानी लाल हो गया था, मुंशीगंज गोली कांण्ड जलिया वाला बाग के समकक्ष घटना थी परन्तु कतिपय कारणों से इस घटना को इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला।

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