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शीशमहल vs राजमहल

शीशमहल हो या राजमहल, दोनों सरकारी आवास हैं, तो स्वाभाविक है कि दोनों महल जनता के टैक्स के पैसे से बने होंगे।

भारतीय इतिहास में पहली बार कैग (CAG) ने किसी मुख्यमंत्री के सरकारी आवास का ऑडिट किया है।

कट्टर ईमानदार केजरीवाल जी इसको मुद्दा भी बना सकते हैं लेकिन जनता के पैसे का दुरुपयोग तो दोनों महलों में हुआ है, चाहें कम या ज्यादा।

दोनों को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए क्योंकि एक महोदय VIP कल्चर के खिलाफ थे और दूसरे महोदय का तो लगभग पूरा जीवन फ़क़ीरी में ही व्यतीत हुआ है।

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