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बिना दुकान के सिर्फ कागजों पर सामाग्री देकर विद्यालयों के वार्षिक अनुदान राशि बटोर रहे जयपाल जायसवाल प्रभारी संकुल प्राचार्य निवास*



* AIMA MEDIA सिंगरौली/सीधी से आलोक तिवारी *

जानकारी के अनुसार आपको बतादें कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निवास के प्रभारी संकुल प्राचार्य जयपाल जायसवाल अपने संकुल प्राचार्य के पावर का दुरूपयोग कर संकुल अंतर्गत आने वाले प्राथमिक / माध्यमिक / हाई स्कूल / हायर सेकण्डरी विद्यालयों के संस्था प्रमुखों पर दबाव बनाकर संस्थाओं में आने वाली वार्षिक अनुदान राशि यानी कि कंटरजेंसी की राशि एवं अन्य मदों की राशि को स्वयं के द्वारा फर्जी तरीके से संचालित पूनम ट्रेडर्स बंजारी के नाम से बिल व्हाउचर लगवाकर डिजी गो के माध्यम से फर्म के नाम पर भुगतान करवाते हैं। संकुल प्राचार्य द्वारा संस्था प्रमुखों को बदले में भुगतान राशि का 40 प्रतिशत राशि काटकर रूपए नगद या संस्था प्रमुखों के व्यक्तिगत बैंक खातों में अंतरण किया जाता है। जिस राशि का उपयोग संस्था प्रमुख अपने निजी कार्यों में उपयोग करते है। और किसी भी दुकान से कोई सामान नहीं लिया जाता है। जिससे उक्त दोनो पक्षों का बंदरवाट चलता है। सच तो यह है कि पूनम ट्रेडर्स नाम का कोई भी दुकान बंजारी गाँव में नहीं है जहाँ स्टेशनरी स्पोर्टस सामाग्री एवं अन्य ऐसी सामाग्रियाँ उपलब्ध हों। बतादें कि जी.एस.टी पर सामाग्री क्रय किए बिना जी.एस.टी का फर्जी बिल भी दे रहे है। इस कारण से निवास संकुल के अतर्गत आने वाले विद्यालयों में छात्रहित का कोई भी सामाग्री उपलब्ध नहीं रहता है। मात्र कागजों में चलता है। पूनम ट्रेडर्स बंजारी के जी.एस.टी. बिल में भी संकुल प्राचार्य जयपाल जायसवाल अपना मोबाइल नंबर 9893592139 विक्रेता के रूप में दर्ज कराए है। जो उनके सरकारी नौकरी के आनलाइन एवं आफलाइन रिकार्डो में दर्ज है। इसी तरह से अपने कार्यरत संस्था शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निवास में भी पूनम ट्रेडर्स बंजारी का फर्जी बिल लगाकर राशि आहरित करते है। इसलिए ऐसे प्राचार्य एवं पूनम ट्रेडर्स बंजारी पर कार्यवाही होना अति आवश्यक है। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जिला प्रशासन को यह अवगत कराया जाता है कि इस तरह से की जा रही भ्रष्टाचार की जाँच की कार्यवाही की जाय जिस्से शासन द्वारा दी जाने वाली राशि का शाला के विकाश में सही उपयोग हो सके एवं भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।

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