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बेगूसराय का नौलखा मंदिर


रामचरितमानस की एक पंक्ति है.
समरथ को नहीं दोष गोसाई, यह दोहा जो है भले ही 14वीं शताब्दी में लिखी गई हो, लेकिन आज के समय में यह पंक्ति बिहार के कई बड़े धरोहरों पर भी लागू होती है. बिहार के कई बड़े-बड़े मंदिरों एवं उनकी संपत्तियों पर कब्जा करने वाले जो बड़े-बड़े माफिया हैं वह मजे में हैं.
बिहार के पूर्व राजा महाराजा एवं यहां के महंतों ने भले ही बिहार में उद्योग स्थापित नहीं कर पाए हैं, लेकिन मंदिरों के निर्माण में यहां के लोग जो है दिल खोल कर अपना योगदान दिए हैं। ऐसे में मंदिरों की खराब दुर्दशा देखकर मन थोड़ा विचलित हो जाता है।
इन्हीं में से एक मंदिर है बिहार का बेगूसराय जिला में अवस्थित नौलखा मंदिर, यह देश का पहला एक ऐसा मंदिर है जहां की दीवारों पर शीशे से कलाकृतियों की गई है.
इस मंदिर का निर्माण जो है आजादी के तुरंत बाद हुआ था और इस मंदिर के निर्माण में उसे समय ₹9 लाख खर्च हुए थे. कुछ समय पहले तक यह मंदिर अपनी सुंदर कलाकृतियों के कारण शहर में चर्चा का विषय थी. लेकिन अब यह अपनी सुंदरता का बाट जोह रहा है. एक समय था जब यह मंदिर बिहार के गिने-चुने हुए मंदिरों में से एक माना जाता था.

वैसे इस मंदिर की सौंदर्य करण के लिए राज्य सरकार ने भी कुछ पड़ता तो जरूर दिखाई है लेकिन जितनी होनी चाहिए उतनी नहीं है. वैसे तो मंदिर की स्थापना के वक्त ही इसकी वसीयत में स्पष्ट शब्दों में यह लिख दिया गया है कि इस मंदिर के संपत्ति को बेचने का अधिकार किसी को नहीं है लेकिन अभी के समय में यहां के कुछ लोग इस मंदिर की भूमि को खरीदने का दावा करते हैं। वैसे कहां जाए तो इस मंदिर की कुल जमीन जो है 200 एकड़ की है लेकिन अभी मंदिर के कब्जे में जो वास्तविकता है वह मात्र 35 एकड़ कब्जे में है। इस मंदिर के पास संपत्ति की कोई कमी नहीं है लेकिन इस मंदिर के संस्थापक महंत की आगे की पीढ़ी एवं कुछ लालची दबंग
की निगाहें हमेशा इस मंदिर की और बनी रहती है वैसे तो राज्य सरकार की बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद की पहल पर इसमें दिलचस्पी तो जरूर दिखाई है, इससे क्या लगता है कि मंदिरों की जो कायाकल्प की जो संभावना है वह थोड़ी बनी हुई है।
बेगूसराय शहर में अवस्थित यह मंदिर अपने आगोश में 22 दुकान रखे हुए हैं. इसका किराया लंबे समय से नहीं लिया गया है। वर्ष 1993 में जब मंदिर का प्रबंध जिला प्रशासन ने अपने अंदर ले लिया तब से ही आम जनों को इसमें कोई रुचि नहीं नजर आ रही है. प्रशासन को चाहिए था कि इस मंदिर को धार्मिक पर्यटक के रूप में विकसित करना चाहिए था, जिससे आम जनों में प्रशासन के प्रति भी विश्व सुनीता बनी रहती और जिले का भी नाम आगे होता।

मंदिर का जो प्रवेश द्वार है वह बड़ा ही भाव है और भंडारे के लिए जो भवन है बेहद विशाल है विशाल मंदिर का जो है वह परिसर देखने में बहुत ही आकर्षक लगता है और अंदर की तरफ जो तालाब है वह और भी मंदिर की सुंदरता बढ़ा देता है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह सभी चीज अपनी बदहाली पर रो रहा है आज के समय में यह मंदिर जो है अपनी सभी प्रकार की सुंदरता जो है धीरे-धीरे खोते जा रही है, मंदिर परिसर की करोड़ों की जमीन जो कब्जा कर लिया गया है कृपया उसे पर सरकार ध्यान दें, यह मंदिर कोई खूबसूरत धार्मिक स्थल ही नहीं है, यह बेगूसराय एवं बेगूसराय के आसपास बसे लोगों के लिए भावना से जुड़ा हुआ है

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