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जो शिक्षा मनुष्य को धीर-वीर- गंभीर नहीं बनाती है तो ऐसी शिक्षा को बन्द कर देना चाहिए : स्वामी विमर्शानन्द गिरि

श्री गोपेश्वर विद्यापीठ द्वारा आयोजित मातृ शक्ति सम्मेलन में बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने किया संभागित्व

बीकानेर। बालकों की प्रथम पाठशाला माँ की कोख होती है। यदि उसकी उपेक्षा होगी तो दूसरी पाठशाला माँ की गोद की उपेक्षा होना सुनिश्चित है। ये उद्गार शुक्रवार को श्री गोपेश्वर विद्यापीठ सैकेंडरी स्कूल द्वारा आयोजित मातृ शक्ति सम्मेलन में श्री लालेश्वर महादेव मंदिर, शिवमठ, शिवबाड़ी के महंत स्वामी विमर्शानन्द गिरि जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बच्चों की तीसरी पाठशाला माँ का घर एवं चौथी पाठशाला उसकी माँ का पड़ौस होती है। इन चारों पाठशाला के बाद विद्यालय का नंबर आता है। इसलिए विद्यालय का दायित्व बहुत बड़ा हो गया है क्योंकि यदि पहली चार पाठशालाओं में कहीं पर भी उपेक्षा होगी तो उसका समाधान वर्तमान में श्री गोपेश्वर विद्यापीठ जैसे विद्यालय ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में स्त्री का दायित्व दुगुना हो गया है। उसे अपने बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की चुनौती से झूझना ही होगा। इस अवसर पर वरिष्ठ मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. गौरव बिस्सा ने कहा कि माँ को अपने बच्चों को कमजोर नहीं अपितु जुझारू बनाना चाहिए। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से बताया कि जुझारू बच्चों की सफलता का प्रतिशत बहुत अधिक है। उन्होंने कहा कि बच्चों की गलती पर उन्हें डांटने फटकारने की बजाय प्यार से उनकी भूल का सुधार करने के प्रयास आवश्यक है। नेशनल करिअर काउंसलर डॉ. चंद्र शेखर श्रीमाली ने इस अवसर पर सक्सेस पेरेंटिंग के लिए विभिन्न उदाहरण उपस्थित मातृ शक्ति से शेयर किए। भारतीय जनता पार्टी की बीकानेर शहर अध्यक्ष श्रीमती सुमन छाजेड़ ने अपने वक्तव्य में कहा कि मातृशक्ति को समर्पित इस कार्यक्रम में आकर वे अभिभूत हैं। वर्तमान टेक्नोलॉजी के समय में संस्कारों के लिए ऐसे आयोजन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। वरिष्ठ विज्ञानविद् मो. फारूक ने अपने संक्षिप्त संबोधन में विद्यापीठ के सभी नवाचारों एवं आयामों की भरपूर प्रशंसा की। सूरज बाल बाड़ी उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार स्वामी, करुणा इंटरनेशनल संस्था के शिक्षा अधिकारी घनश्याम साध, समाजसेविका पूजा ने भी विचार व्यक्त किए।
राकेश कुमार जोशी,
गणेश सियाग, पुरुषोत्तम चौहान, विष्णु नायक,
इत्यादि सहित अनेक गणमान्य जन एवं मातृशक्ति ने इस अभिनव आयोजन में सक्रिय सहभागिता की। नवरात्रि का व्रत रखने वाले 23 स्टूडेंट्स एवं रोजा करने वाले 20 स्टूडेंट्स को साधना - अनुरागी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। श्री गोपेश्वर विद्यापीठ के समन्वयक गिरिराज खैरीवाल ने आयोजन की महता बताई। शाला प्रधान भंवरी देवी ने स्वागत संबोधन दिया। संस्था के अध्यक्ष रमेश कुमार मोदी ने आभार व्यक्त किया। कैलाश पंवार ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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