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⚖️ वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तेज़, देशभर में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली, 19 अप्रैल 2025 — देशभर में विवाद का कारण बने वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हुई। यह अधिनियम संसद में इसी साल पारित हुआ था, जिसे लेकर कई संगठनों और व्यक्तियों ने संवैधानिक सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह अधिनियम संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ कर रहे हैं, ने केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा, "यह मामला संवेदनशील है और इससे देश की धर्मनिरपेक्ष संरचना और नागरिकों के अधिकार जुड़े हुए हैं। इसे तर्कसंगत ढंग से हल किया जाना आवश्यक है।"
क्या है वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025?

यह अधिनियम वक्फ संपत्तियों की पहचान, प्रबंधन और पुनः अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रियाओं को और सख्त बनाता है। नए संशोधन के अनुसार, किसी भी वक्फ संपत्ति पर दावा करने वाले को स्पष्ट दस्तावेज़ी साक्ष्य देने होंगे, और राज्य सरकार को वक्फ बोर्ड की सिफारिश के बिना हस्तक्षेप करने की सीमाएं तय की गई हैं।
विरोध और हिंसा

अधिनियम के विरोध में कई राज्यों में प्रदर्शन हुए हैं, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में 3 लोगों की मौत हो गई और 270 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। कई मुस्लिम संगठन इसे “धार्मिक अधिकारों पर चोट” मान रहे हैं, वहीं सरकार इसे “पारदर्शिता और अनुशासन की दिशा में कदम” बता रही है।
केंद्र सरकार का पक्ष

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि यह अधिनियम "वक्फ संपत्तियों की लूट रोकने और दुरुपयोग को खत्म करने" के लिए जरूरी है। उन्होंने कोर्ट से अपील की कि यह मामला न्यायिक समीक्षा के योग्य नहीं है क्योंकि यह एक 'नीति निर्णय' है।
आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 2 मई 2025 निर्धारित की है। तब तक सभी संबंधित पक्षों को अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

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