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"शिक्षा में व्यापार की भागीदारी, पड़ रही अभिभावकों के जेब भर भारी" आखिर क्यों मौन है शिक्षा विभाग,बिना मान्यता और निश्चित मानकों क्यों अनदेखा कर रही शिक्षण संस्थाएं

उरई(जालौन) जिले में इस बर्ष भी कई शिक्षण संस्थाएं कुकुरमुत्तों की तरह बिना मान्यताओं और बिना तय मानकों के सामने आ चुकी है।प्रशासन की निष्क्रिय कार्यवाही और दया दृष्टि से ये वृहद रूप से अपनी जड़ों को समेटने की जगह जमाने में लगी हैं।अनियमितताओं की अगर बात की जाए तो बिना मान्यता के कई विद्यालय अपनी तरफ से जड़ें फैला चुके है और कई तो निश्चित मानकों को दरकिनार किए हुए है।भारी भरकम फीस और सुविधाओं के नाम पर स्वच्छ हवा तक बच्चों को मुहैया तक नहीं करवाई जाती है।कई विद्यालयों में तो अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था भी अन्यत्र एवं सुविधा शुल्क के रूप में की जा रही है।कही मान्यता जूनियर की है तो वह इंटरमीडिएट तक की कक्षाएं संचालित कर रहे है।
किताबों का बोझ अभिभावक पर इस तरह आमादा है कि नर्सरी की किताबों का मूल्य 3000 रुपए तक जेब पर पड़ रहा है।

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