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कलेक्टर ने किया जिले को जल अभावग्रस्त घोषित

(अंतर्गत म०प्र० पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 संशोधन 2022)
अशोकनगर। भीषण गर्मी में पेयजल व निस्तार की आवश्यकता पूर्ति हेतु जिले में आम नागरिकों के लिए जल की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर आदित्य सिंह ने जिले को जल अभावग्रस्त घोषित किया है।
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि
जिले में पेयजल व निस्तार की आवश्यकता पूर्ति हेतु सम्पूर्ण अशोकनगर जिले को मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 संशोधन 2022 की धारा 3 के अंतर्गत जल अभावग्रस्त घोषित किया जाता है। सम्पूर्ण अशोकनगर जिले को जल अभावग्रस्त घोषित किये जाने का आशय यह होगा कि इस कार्यालय की अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति किसी जलस्त्रोत यथा नदी, बंधान, जलधारा, जलाशय बंधान आदि से सिंचाई या अन्य औद्योगिक प्रयोजन हेतु जल का उपयोग नहीं कर सकेगा। जिले को जल अभावग्रस्त घोषित किये जाने का आशय यह भी होगा कि कलेक्टर या इस संबंध में प्राधिकृत अन्य अधिकारी की अनुज्ञा के बिना जिले की सीमा में कोई भी निजी नलकूप खनन नहीं किया जावेगा। जिले के सतही जल स्त्रोत नदी, नाले के डाउन स्ट्रीम में सतह के नीचे भूमिगत बहाव रोकने, कलेक्टिंग पाईप या रेडियल कलेक्टर बेल का उपयोग कर जल का उपयोग नहीं किया जायेगा। जिले के पेयजल स्त्रोतों में कुल आवश्यक जल क्षमता के विरूद्ध उपलब्ध जल क्षमता कम है। अतः जिले के पेयजल स्रोतों से सिंचाई के प्रयोजन के लिए जल के उपयोग पर प्रतिबन्ध लागू होगा। जिले में नदी नालों पर संचालित उद्‌वहन योजनाओं में पानी की उपलब्धता के आधार पर संबंधित ग्राम पंचायत व जल उपभोक्ता संस्था की अनुशंसा और जल संसाधन विभाग के प्रतिवेदन के आधार पर इस कार्यालय द्वारा सिंचाई की अनुमति दी जावेगी। जिन नदी-नालों में पानी नहीं बह रहा है, वहां नदी-नालों में रूके हुए पानी के लिए कोई अनुमति नहीं दी जावेगी। केंद्रीय शासन एवं उनके उपक्रमों और राज्य शासन के विभागों व उनके उपक्रमों को नलकूप खनन की छूट इस शर्त पर दी जाती है कि जिस स्थान पर नलकूप खनन किया जा रहा है वह मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 6 के अनुसार व्यतिकरण परिक्षेत्र में नहीं आता हो, अर्थात उस स्थल के 100 मीटर के भीतर कोई ऐसा नलकूप न हो जिस पर सार्वजनिक जल प्रदाय व्यवस्था आधारित हो। उक्त शर्त के पालन की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी। उपरोक्त अपवादों के अतिरिक्त अशोकनगर जिले को जल अभावग्रस्त घोषित किया जाता है। उक्तानुसार निर्धारित क्षेत्रों में नदी/बांधों/नहरों/जलाशयों/बंधानों से घरेलू प्रयोजन के अतिरिक्त किसी अन्य प्रयोजन के लिए पानी का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति आदेश का उल्लंघन कर नलकूप खनन करता है तो यह अधिनियम की धारा 9 के अन्तर्गत प्रथम अपराध के लिए 5 हजार रूपये के जुर्माने से और पश्चातवर्ती प्रत्येक अपराध के लिए 10 हजार रुपये के जुर्माने से या कारावास से जो 2 वर्ष तक का हो सकता है से दण्डनीय होगा। यदि कोई भी व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में सिंचाई अथवा औद्योगिक प्रयोजन के लिए पानी के उपयोग की अनुमति चाहता है, तब वह अधिनियम की धारा 4 व संबंधित नियमों के अन्तर्गत आवेदन संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी को प्रस्तुत करेगा। इसी प्रकार कोई व्यक्ति नलकूप खनन की अनुमति चाहता है तो अधिनियम की धारा 6 के अन्तर्गत आवेदन उक्त प्राधिकृत अधिकारी के कार्यालय में प्रस्तुत कर सकता है। उक्त अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत नवीन बोरिंग खनन/बोरिंग सफाई के विशेष परिस्थितियों में अनुमति देने के लिए सभी अनुविभागीय अधिकारियों को अपनी-अपनी सीमा में अधिकृत किया गया है। यह आदेश 30 जून 2025 तक या अच्छी वर्षा होने तक प्रभावशील रहेगा तथा आदेश का कड़ाई से पालन किया जायेगा।

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