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विदर्भ में पहला "बलून बंधारा" बनेगा गोंदिया के बाघ नदी पर, 109 करोड़ की राशि मंजूर



विधायक विनोद अग्रवाल के प्रयासों से रजेगांव-काटी उपसा सिंचन योजना को मिलेगा जीवनदान, 10 हजार एकड़ क्षेत्र होगा सिंचित

गोंदिया। (11मई)
महाराष्ट्र के अंतिम छोर के गोंदिया जिले में नदी के पानी को रोकने के लिए तथा इस पानी को सिंचाई के लिए उपयोग लाने हेतु नए तरीके का बलून बंधारा रजेगांव स्थित बाघ नदी पर विधायक विनोद अग्रवाल के प्रयासों से निर्माण होने जा रहा है। इसके लिए विधायक विनोद अग्रवाल ने सरकार से अनुरोध कर 109 करोड़ रुपये की राशि जलसंपदा विभाग से मंजूर करायी है।

अमेरिका और चीन की टेक्नोलॉजी पर आधारित ये बलून बंधारा गोंदिया तहसील के रजेगांव बाघ नदी पर रजेगांव-काटी उपसा सिंचन योजना को जीवनदान देने निर्मित होने जा रहा है। भारत में बलून बंधारे की निर्मिति सबसे पूर्व जळगाव के गिरना नदी पर प्रायोगिक तौर पर हुई थी, उसके बाद अनेक नदियों पर इसका निर्माण किया गया परंतु विदर्भ के गोंदिया जिले में इसका निर्माण पहली बार किया जा रहा है।

विधायक विनोद अग्रवाल ने बताया कि रजेगांव-काटी उपसा सिंचन योजना बनाई तो गई पर पानी का ठहराव न हो पाने के कारण ये योजना मृत रूप में पड़ी हुई है, जिसका फायदा सिंचन के लिए अबतक नही हो पाया। परंतु हमने सरकार से बार बार आग्रह कर रजेगांव बाघ नदी पर बैराज की मांग की, जिस पर सरकार ने हमें 109 करोड़ रुपये लागत का बलून बंधारा दिया है।

विधायक विनोद अग्रवाल ने आगे कहा, ये बलून बैराज अमेरिका और चीन की टेक्नोलॉजी पर आधारित है। बंधारा हवा के दबाव से स्वयचलित होगा तथा बलून सेंसर तकनीक से काम करेगा। ये बुलेटप्रूफ होकर नीचे बेड लेबल पर 3 मीटर पानी को संग्रहित करेगा।

उन्होंने आगे कहा, 25 से 40 फिट तक रेती होने पर नीचे सीमेंट कांक्रीट किया जाएगा जिस पर ये खड़ा रहेगा। बलून बंधारे में पानी के ठहराव से करीब 10 हजार एकड़ सिंचन क्षेत्र सिंचित होगा। जल्द ही इस कार्य की शुरुवात को लेकर विदर्भ पाटबंधारे विभाग के अधिकारियों से उचित दिशा निर्देश जारी है।

गौरतलब है कि विधायक विनोद अग्रवाल के प्रयासों से हाल ही में वैनगंगा नदी पर 395 करोड़ रुपये लागत के महत्वाकांक्षी डांगोरली बैराज को मंजूरी दिलाई गई, जिसका कार्य भी शुरुवाती चरण में है। नदी पर पानी का ठहराव कर जहां ग्रामीण और शहर को 24 घँटे पीने का शुद्ध पानी मिलेगा वही करीब 5861 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचन से लाभान्वित होगा। आने वाले सालों में गोंदिया तहसील पानी की किल्लत से दूर रहेगा और खेत खलिहान हरेभरे होंगे।

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