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गोपालपुर प्राथमिक विद्यालय की कक्षा छह का छात्र।

गोपालपुर प्राथमिक विद्यालय की कक्षा छह का छात्र। नाटक, अध्ययन और नृत्य सभी क्षेत्रों में उनकी असाधारण प्रतिभा थी। मोहल्ले में हर कोई उससे प्यार करता था।

रविवार की दोपहर को मेरी माँ ने कहा, "मेरे लिए बाजार से कुछ कुरकुरे ले आओ।" कृष्णेंदु खुश होकर गोपालपुर बाजार में एक दुकान की ओर भागे। लेकिन उस समय दुकानदार दुकान में नहीं था। कृष्णेंदु खड़ा होकर इंतजार करने लगा। इसी दौरान उसकी नजर दुकान के सामने सड़क के किनारे चिप्स का एक पैकेट पड़ा हुआ दिखाई दिया।

जैसे ही उसने पैकेट उठाया और घर की ओर चला, दुकानदार वहां आ पहुंचा। वह पेशे से एक नागरिक पुलिस अधिकारी हैं। बिना कुछ समझे वह चिल्लाया, "तुमने चोरी की है!" उस समय बाजार लोगों से खचाखच भरा हुआ था। कृष्णेन्दु को सबके सामने कान पकड़कर बैठाया गया। किसी ने उन्हें अपना बचाव करने का मौका नहीं दिया।

इस अपमान ने कृष्णेंदु जैसे संवेदनशील बालक के मन पर गहरा घाव कर दिया। उस रात उन्होंने एक नोट लिखा:
“माँ, मैंने तुमसे कहा था कि मैंने सड़क के किनारे से गाजर उठाई थी। मैंने उसे चुराया नहीं।”

इसके बाद उसने कीटनाशक पीकर आत्महत्या कर ली।

अगले दिन पुलिस ने जांच शुरू की। गोपालपुर बाजार के आसपास की दुकानों के सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि कृष्णेंदु ने वास्तव में सड़क किनारे पड़े चिप्स के पैकेट को उठाया था, कोई चोरी नहीं हुई थी।

बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पूरे क्षेत्र में गहरा शोक छा गया। स्कूल में, मोहल्ले में, मंच पर - जहाँ कहीं भी उसने रोशनी जलाई थी, वहाँ अब केवल अकेलापन था।

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