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जनपद डभरा में पहली बार अध्यक्ष-उपाध्यक्ष कक्ष पर ताले! जनपद कार्यालय आम जनता के लिए बंद! बढ़ रही नाराजगी सरकारी कक्ष को 'बपौती' समझ बैठे जनप्रतिनिधि? जनपद सदस्य नहीं, परिवारजन बैठे अध्यक्ष कक्ष में! जनता की पहुंच से बाहर हो गया जनपद नेतृत्व


डभरा (छत्तीसगढ़), 29 मई
जनपद पंचायत डभरा में इन दिनों एक असामान्य स्थिति ने जनमानस का ध्यान आकर्षित किया है। जनपद पंचायत के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है जहाँ जनपद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के लिए बनाए गए कक्ष आम जनता के लिए बंद कर दिए गए हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद कार्यालय में विभागीय कक्षों के साथ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए विशेष रूप से कक्ष आबंटित किए गए हैं, ताकि आम लोग अपनी समस्याएँ सीधे जनप्रतिनिधियों के समक्ष रख सकें। परंतु अब ये कक्ष केवल तब खोले जाते हैं जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष स्वयं कार्यालय में उपस्थित होते हैं — अन्यथा कक्षों को ताला लगाकर बंद कर दिया जाता है।


चर्चा का विषय यह भी है कि इन कक्षों को सार्वजनिक धन से बनाया गया है, फिर भी इनका उपयोग निजी संपत्ति की तरह किया जा रहा है। कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि अध्यक्ष व उपाध्यक्ष इसे 'अपनी बपौती' समझ बैठे हैं, जैसे उन्होंने निजी जमीन बेचकर निर्माण करवाया हो।


एक और गंभीर विषय यह है कि वर्तमान समय में अधिकांश जनपद सदस्य महिलाएँ हैं, जो नियमित रूप से कार्यालय नहीं आतीं। उनकी अनुपस्थिति में उनके पारिवारिक सदस्य अध्यक्ष कक्ष में अधिकारपूर्वक बैठते व आराम करते देखे जाते हैं, जो कि न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि जनता की भावनाओं के साथ भी खिलवाड़ है।


प्रश्न यह उठता है कि जब कक्ष अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नाम से आबंटित है, तो अन्य जनपद सदस्य या उनके परिजन किस अधिकार से वहाँ बैठते हैं? यह व्यवस्था न केवल प्रशासनिक अनुशासन के लिए चुनौती है, बल्कि आम जनता के लिए निराशाजनक भी।


इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में चर्चा का बड़ा मुद्दा बना लिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनपद कार्यालय आम जनता की समस्याओं के समाधान का स्थान है, न कि विश्रामगृह।


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