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मौसम की बेरुखी से किसान है हाकलन ,पानी के लिए मचा हाहाकार*

*मौसम की बेरुखी से किसान है हाकलन ,पानी के लिए मचा हाहाकार*
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जिला शिवहर में अमूमन जून माह से ही बागमती नदी खतरे को निशान पार कर जाती थी
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जल संकट से जिला शिवहर जुझ रहा , अधिकांश चापा कल सुख गए, अधिकतर जगहों पर धान की खेती नहीं हो पा रही
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अधिकांश जगहों पर स्वच्छ जल पीने को मोहताज है नागरिक
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शिवहर एक्सप्रेस----बिहार के कई जिलों में, मानसून की बेरुखी के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में सामान्य से बहुत कम बारिश हुई है, जिससे किसानों की फसलें सूखने लगी हैं। जिला शिवहर में तो मौसम की बेरुखी के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

जिले के अधिकतर इलाकों में चापाकल के पानी सूख गए हैं। बारिश नहीं होने के कारण धान की खेती बर्बाद हो रही है। पटवन कर जो किसान थोड़ी मोडी धान की खेती भी कर लिए है वह बारिश के पानी नहीं होने के कारण धान की फसल सूख रही है।

किसानों का कहना है कि धान के बिचड़े सूख रहे हैं और खेतों में दरारें पड़ रही हैं। वे चिंतित हैं कि अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई तो उनकी फसलें बर्बाद हो जाएंगी।

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में हल्की बारिश की संभावना जताई है, लेकिन किसानों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं होगी। राज्य सरकार ने किसानों को डीजल पर अनुदान देने की घोषणा की है ताकि वे पंप सेटों का उपयोग करके सिंचाई कर सकें। मौसम की बेरुखी ने किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, और सरकार को तत्काल सिंचाई व्यवस्था और अन्य सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है ताकि वे अपनी फसलें बचा सकें।

मौसम की बेरुखी, जैसे सूखा, बाढ़, या अत्यधिक तापमान, से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार कई योजनाएं चलाती है। इन योजनाओं में फसल बीमा, वित्तीय सहायता, और अन्य राहत उपाय शामिल हैं। मौसम आधारित फसल बीमा योजना ।

जी हां सरकार प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण फसल के नुकसान के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह योजना मौसम के विभिन्न मापदंडों जैसे वर्षा, तापमान, और आर्द्रता को ध्यान में रखती है।

गौरतलब हो कि शिवहर में आमतौर पर जून माह में ही बागमती नदी लाल निशान 61.28 सेंटीमीटर को पार कर जाया करती थी ,पर इस साल अभी तक नहीं देखने को मिला।

वर्ष 2016 में 20 जून को बागमती नदी खतरे के निशान पर कर गई थी। वर्ष 2017 में 28 जून से शिवहर में बाढ़ का प्रकोप आया था। 9 जून 2018 को शिवहर जिले में भीषण बाढ़ आई थी जिससे फसल नुकसान हो गया था। वर्ष 2020 में 17 जून को भीषण बाढ़ ने तबाही मचाई थी। 2021 में 17 जून को तथा 23 जून को बागमती नदी उफनने से फसल बर्बाद हुई ही साथ ही मोतिहारी पथ बह गया था। वर्ष 2023 में तथा 7 जुलाई 2024 को बागमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान पार कर गया था। लेकिन इस बार जुन -जुलाई महीना समाप्त हो रहा है बाढ़ का आता पता नहीं है। विपरीत परिस्थिति में भी जिले के अधिकांश चापाकलो से जो 200 फीट से ज्यादा है उसका पानी (लेयर) भी समाप्त हो गया है।

*संजय गुप्ता सहारा न्यूज़ नेटवर्क शिवहर*

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