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मैं कौन हूं

मैं कौन हूँ?

रिटायरमेंट के बाद, जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। आत्मचिंतन की गहराई में उतरते हुए, मैंने अपने जीवन को देखा और सोचा कि मैंने क्या हासिल किया है और क्या खो दिया है।

जीवन की सच्चाई

मैंने अपने जीवन में कई चीजें जमा कीं - बंगला, फार्महाउस, फ्लैट। लेकिन आज, मैं चार दीवारों के बीच कैद हूँ। साइकिल से शुरुआत करके, मैंने कई वाहन खरीदे, लेकिन आज मैं नंगे पाँव चलता हूँ।

यात्राएँ और अनुभव

मैंने दुनिया भर की यात्राएँ कीं, लेकिन आज मेरा सफर घर के अंदर ही सीमित है। मैंने कई संस्कृतियों और परंपराओं को जाना, लेकिन आज मैं अपने परिवार को समझने की कोशिश करता हूँ।

जीवन की प्राथमिकताएँ

मैंने जीवन के कई पड़ावों को धूमधाम से मनाया, लेकिन आज मैं अपने दैनिक जीवन की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करता हूँ। मैंने कभी दूसरों के लिए रोटियाँ बनवाईं, लेकिन आज मैं अपने लिए ही कुछ निवाले जुटा पाता हूँ।

सच्चाई की खोज

मैंने अपने जीवन में कई चीजें इकट्ठा कीं - सोना, चांदी, हीरे, मोती। लेकिन आज मैं एक साधारण सूती कपड़े में गर्व से घूमता हूँ।

आत्म-चिंतन

मैंने कई भाषाएँ सीखीं, लेकिन आज मैं अपनी मातृभाषा में ही समाचार पढ़ता हूँ। मैंने काम के लिए लगातार यात्रा की, लेकिन आज मैं उसके लाभ-हानि पर विचार करता हूँ।

निष्कर्ष

अब मैं समझता हूँ कि जीवन की सच्चाई क्या है। मैंने जीवन को दुनिया के पीछे भागते हुए बिताया, और अब पहली बार, जब मैं हाथों में माला घुमाता हूँ, तब आत्मा की आवाज़ सुनाई देती है।

आत्म-समर्पण

हे प्रकृति, मैं तुम्हारा ही अंश हूँ। मैं कभी आकाश में उड़ता था, अब धरती पर लौट आया हूँ। मुझे क्षमा करो… एक और मौका दो, जीवन को सही ढंग से जीने का। एक सच्चे इंसान की तरह जीने का… संस्कारों और मूल्यों के साथ जीने का, परिवार और प्रेम के साथ जीने का।

!!शब्द संयोजन!!

*©अशोक चौधरी "प्रियदर्शी"*✍️कटिहार, बिहार
संपर्क: 9431229143
E-mail: ashoke.bms@gmail.com

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