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लखनऊ के सीपीसीआई में ढाबा संचालक की दबंगई चाय विक्रेता और उसके नाबालिक बेटे को जान से मारने की धमकी प्रशासन मौन

*लखनऊ ,एसजीपीजीआई के पास ढाबा संचालक की दबंगई, चाय विक्रेता और नाबालिग बेटे से मारपीट, दी जान से मारने की धमकी*

लखनऊ के एसजीपीजीआई क्षेत्र से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ गुप्ता ढाबा के संचालक बाप बेटे पर गुंडई और खुलेआम धमकी देने का आरोप लगा है। जानकारी के मुताबिक ढाबे के नजदीक चाय बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले प्रदीप सोनी और उनके 16 वर्षीय बेटे को ढाबा मालिक ने न केवल थप्पड़ पर थप्पड़ मारे, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ढाबा संचालक का रवैया बेहद उग्र और धमकीपूर्ण था। मारपीट के दौरान उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी मेरा पीजीआई की पुलिस, मैं देख लूंगा सबको।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब ढाबा संचालक ने इस तरह की दबंगई दिखाई हो। लोगों में इस बात को लेकर भी रोष है कि पीजीआई थाना क्षेत्र में होने के बावजूद पुलिस की चुप्पी ढाबा मालिक के हौसले बुलंद कर रही है। क्योंकि ढाबा संचालक को पीजीआई पुलिस का संरक्षण प्राप्त है वही चाय विक्रेता प्रदीप सोनी का कहना है कि यह घटना घटने के बाद वह अभियुक्त के खिलाफ थाने में तहरीर देने गया था लेकिन पुलिस वाले उसकी तहरीर पर कोई कार्रवाई ना करते हुए उसे वापस लौटा दिए 3 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने ढाबा संचालक और उसके बेटे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की l जहां एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि गरीबों पर अत्याचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, वहीं लखनऊ के एसजीपीजीआई थाना क्षेत्र में गुप्ता ढाबा के संचालक की गुंडई ने इस बयान को ठेंगा दिखा दिया है।स्थानीय नागरिकों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस रोज़ाना रात 11 बजे के बाद क्षेत्र के सभी ढाबे, होटल और ठेले बंद करवा देती है, लेकिन गुप्ता ढाबा रात 2 बजे तक खुलेआम चलता रहता है।
क्या यह बिना पुलिस की मिलीभगत के मुमकिन है lक्षेत्रीय लोगों और पीड़ित परिवार की मांग है कि:

ढाबा संचालक पर गंभीर धाराओं में एफआईआर हो,
पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए,
मुख्यमंत्री कार्यालय इस मामले में सीधा संज्ञान ले l
पीड़ित चाय विक्रेता ने घटना के बाद एसजीपीजीआई थाने में तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने न तो एफआईआर दर्ज की और न ही आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई की।
तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन तहरीर सिर्फ में थाने में रखी हुई एक फाइल बनकर रह गई है।यह घटना सिर्फ एक गरीब चायवाले पर हमले की नहीं है, यह सिस्टम पर सवाल है।पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच , जिन्होंने तहरीर के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की ।
गुप्ता ढाबा आखिर किस नियम, मानक और पंजीकरण के आधार पर चल रहा है।
क्या उसके पास खाद्य विभाग की वैध अनुमति है।
और अगर है, तो कब से...? कितने वर्षों के लिए पंजीकरण हुआ है..?
क्या नगर निगम ने उसे व्यावसायिक संचालन की मंजूरी दी है..?
यह सब अब जांच का गंभीर विषय बन चुका है।
सूर्योदय भास्कर , मुकुल सिंह

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