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Millet's Power


देशभर में प्राकृतिक चिकित्सा और पौष्टिक अनाजों को लेकर जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है। इस दिशा में प्रसिद्ध पोषण वैज्ञानिक डॉ. खदर वल्ली द्वारा सुझाई गई जीवनशैली – जिसे आमतौर पर "डॉ. खदर लाइफस्टाइल" के नाम से जाना जाता है – का छठा स्तंभ है फॉक्सटेल मिलेट (कंगनी बाजरा)। यह एक ऐसा पारंपरिक अनाज है, जो आधुनिक रोगों के लिए प्राकृतिक समाधान के रूप में उभर रहा है।
फॉक्सटेल मिलेट का स्वाद हल्का मीठा और कड़वा होता है, लेकिन इसके गुण किसी औषधि से कम नहीं। इसमें मौजूद 12% प्रोटीन और 8% फाइबर, इसे संतुलित आहार का दर्जा दिलाते हैं। इसके साथ ही इसमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज, फॉस्फोरस और विटामिन B समूह जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फॉक्सटेल मिलेट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है, जिससे यह मधुमेह के रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसके अलावा, यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करता है, जिससे हृदय रोगों की रोकथाम में मदद मिलती है।
👉 राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN), हैदराबाद की एक रिपोर्ट के अनुसार, नियमित सेवन से रक्त में शर्करा और लिपिड प्रोफाइल संतुलित रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फॉक्सटेल मिलेट गर्भवती महिलाओं को होने वाली कब्ज की समस्या में राहत देता है। यह बच्चों में तेज़ बुखार के दौरान होने वाले दौरे (Seizures) और नसों की कमजोरी को दूर करने में भी सहायक है।
डॉ. खदर वल्ली के अनुसार, “यह एक ऐसा भोजन है, जो शरीर की मूल संरचना को मज़बूत करता है और दीर्घकालिक रोगों को जड़ से ठीक करता है।”
पेट दर्द, दस्त, भूख की कमी, पेशाब में जलन जैसी समस्याओं के लिए यह अनाज प्राकृतिक दवा के रूप में कार्य करता है।
आयरन और प्रोटीन की उच्च मात्रा इसे एनीमिया के लिए भी कारगर बनाती है।
गाँवों में आज भी बुज़ुर्ग कहते हैं, “कंगनी का दलिया खाकर विश्राम करो, बुखार खुद उतर जाएगा।” इस परंपरा के पीछे छिपा वैज्ञानिक आधार अब सामने आ रहा है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि फॉक्सटेल मिलेट फेफड़ों की सफाई करता है और इसीलिए यह फेफड़ों के कैंसर के रोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार आहार (base food) माना जाता है।
साथ ही, यह:
त्वचा रोग
मुँह व पेट का कैंसर
पार्किंसन्स रोग
अस्थमा (कोदो मिलेट के साथ)
जैसे रोगों से राहत देने में उपयोगी माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय

डॉ. अरविंद जोशी, वरिष्ठ पोषण विशेषज्ञ का कहना है,
"मिलेट्स भारतीय खाद्य परंपरा का पुनर्जागरण हैं। फॉक्सटेल मिलेट जैसे अनाज न केवल पौष्टिक हैं, बल्कि अनेक रोगों के लिए वैकल्पिक उपचार का माध्यम भी बन सकते हैं।"




• भारत सरकार द्वारा 2023 को “अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष (International Year of Millets)” घोषित किए जाने के बाद से ही मिलेट्स के उपयोग में भारी वृद्धि देखी गई है। फॉक्सटेल मिलेट, इस दिशा में सबसे चर्चित और प्रभावी विकल्पों में से एक बन चुका है।
फॉक्सटेल मिलेट अब सिर्फ़ एक परंपरागत अनाज नहीं, बल्कि यह आधुनिक रोगों से लड़ने का एक प्राकृतिक, सस्ता और प्रभावी समाधान बन चुका है।
डॉ. खदर वल्ली की जीवनशैली को अपनाकर भारत एक बार फिर अनाज आधारित स्वास्थ्य क्रांति की ओर अग्रसर है।

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