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रेलवे अंडरपासों में जलभराव: तकनीक की कमी या रखरखाव की लापरवाही?

रेलवे अंडरपासों में जलभराव: तकनीक की कमी या रखरखाव की लापरवाही?
परिचय:

हर बरसात में हम एक सामान्य समस्या का सामना करते हैं – रेलवे अंडरपासों में पानी भर जाना। हल्की से मध्यम बारिश होते ही ये अंडरपास छोटे तालाब में तब्दील हो जाते हैं। यह समस्या सिर्फ यातायात को नहीं रोकती, बल्कि जनजीवन, आपातकालीन सेवाओं और लोगों की सुरक्षा पर भी सीधा असर डालती है।

जलभराव के मुख्य कारण:

रेलवे अंडरपास में पानी भरने के कई तकनीकी और प्रबंधन से जुड़े कारण होते हैं:

ड्रेनेज सिस्टम की कमी या खराबी – कई जगहों पर अंडरपास का डिजाइन ऐसा नहीं होता कि पानी स्वतः बाहर निकल सके।

नालियों का जाम होना – कचरे, मिट्टी और प्लास्टिक के कारण नालियाँ जाम हो जाती हैं जिससे पानी का निकास रुक जाता है।

ग्राउंड वाटर लेवल ज्यादा होना – कुछ क्षेत्रों में जमीन के नीचे पानी पहले से ही भरा होता है, जिससे जलनिकासी मुश्किल हो जाती है।

बारिश के पानी को संग्रह करने की योजना का अभाव – वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) का न होना इस समस्या को और गंभीर बना देता है।

उपलब्ध तकनीकी समाधान:

आज की आधुनिक तकनीकों से इस समस्या का समाधान संभव है, लेकिन उनका प्रयोग सीमित रूप से किया जा रहा है:

पंप-आधारित जल निकासी प्रणाली – अंडरपास के नीचे एक जल टंकी (sump) बनाई जाती है जिसमें सबमर्सिबल पंप लगे होते हैं। ये पंप बारिश का पानी खींचकर बाहर फेंकते हैं।

स्वचालित जल स्तर सेंसर – कुछ आधुनिक अंडरपासों में ऐसे सेंसर लगाए जाते हैं जो जल स्तर बढ़ते ही पंप को चालू कर देते हैं। यह प्रणाली बिजली और इंटरनेट पर निर्भर करती है।

सौर ऊर्जा चालित पंप – जहाँ बिजली की समस्या है, वहाँ सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप लगाना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

प्रॉपर स्लोप और ओपन ड्रेनेज – अंडरपास के चारों ओर सही ढलान और खुली नालियाँ होने से पानी जल्दी निकल सकता है।

रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम – वर्षा जल को जमीन में सोखने की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि सड़कों पर पानी न रुके।

समस्या की जड़: रखरखाव में लापरवाही

तकनीकें उपलब्ध होने के बावजूद यदि जलभराव होता है, तो उसका कारण केवल अयोग्य रखरखाव, भ्रष्टाचार और लापरवाह योजना है। पंप खराब हैं, नालियाँ सालों से साफ नहीं हुईं, और जिम्मेदारी तय नहीं की जाती – ये ही असली समस्याएँ हैं।

निष्कर्ष:

रेलवे अंडरपासों में जलभराव एक तकनीकी नहीं, बल्कि एक प्रबंधन (management) की समस्या है। जब तक स्थानीय निकाय, रेलवे विभाग और नगर निगम आपस में समन्वय नहीं बनाते, तब तक हर मानसून में यही तस्वीर देखने को मिलेगी।

समय आ गया है कि हम केवल बारिश के बाद सोशल मीडिया पर फोटो डालने की बजाय, इन मुद्दों को लेकर स्थानीय प्रशासन से जवाबदेही माँगें और टेक्नोलॉजी के सही उपयोग की माँग करें।

लेखक – Abhiranjan Dwivedi
तारीख – 29 जुलाई 2025

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