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रैगिंग विरोध की आवाज़ बनी मौत का सिलसिला: लखनऊ की वासवी तोमर की संदिग्ध मृत्यु पर उठते सवाल

भीमताल (नैनीताल), उत्तराखंड ● 2 अगस्त 2025 – Graphic Era Hill University की 18 वर्षीय बीसीए द्वितीय वर्ष की छात्रा वासवी तोमर, जो लखनऊ के मडियांव की निवासी थीं, को नैनीताल स्थित होस्टल में मृत पाया गया। शुरुआत में प्रशासन ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन परिजनों ने इसे हत्या का आरोप लगाते हुए मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।


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🔍 घटना की पृष्ठभूमि

रैगिंग की घटना: वासवी ने अपनी मां को बताया कि उनकी सीनियर छात्राएं पहली वर्ष की एक छात्रा को रैगिंग कर रही थीं। उन्होंने इसका विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप उन पर धमकियां दी गईं और एक सीनियर छात्रा के साथ बहस का वीडियो उन्होंने अपनी मां को भेजा था।

मृत्युकालीन विवरण: बुधवार शाम वासवी का फोन बंद हो गया। देर शाम यूनिवर्सिटी ने परिजनों को बताया कि वासवी ने फंदा लगाकर आत्महत्या की है और भवाली सीएचसी में मृत्त घोषित कर दी गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट: आयुष सिंह (भावी के भाई) का दावा है कि पोस्टमार्टम में गले पर strangulation के निशान पाए गए, जो हत्या की आशंका को तगड़ा बनाते हैं—इस आधार पर उन्होंने आत्महत्या को खारिज किया है।



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🧷 परिवार की दलीलें

माँ बीनू सिंह का कहना है: वासवी बहादुर और मजबूत कन्या थी, वह कभी आत्महत्या नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन व दबंग छात्राएं वासवी की आवाज दबाने की कोशिश कर रही हैं। किसी भी प्रकार की रैगिंग की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई।

भाई आयुष सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय ने छात्राओं को बात करने से रोका और धमकाया जा रहा है। परिवार न्याय की अपील कर रहा है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।



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🏛️ यूनिवर्सिटी का रुख

Graphic Era Hill University ने यह घटना आत्महत्या बताई है। हालांकि, अभी तक उन्होंने कोई सुसाइड नोट सार्वजनिक नहीं किया है। परिवार और पड़ोसियों ने इस पहलू पर गंभीर सवाल उठाए हैं कि यदि वासवी ने आत्महत्या की होती, तो सुसाइड नोट क्यों नहीं दिखाया गया—जो पारदर्शिता में बाधक माना जा रहा है।


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🔎 अगले कदम व जांच

परिवार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है—यह आरोप है कि स्थानीय विश्वविद्यालय प्रशासन मामले को दबाने में जुटा हुआ है।

परिजनों और छात्र संगठनों की तरफ से पुलिस एवं फॉरेंसिक जांच, CCTV फुटेज, फोन रिकॉर्ड्स एवं होस्टल बार्डरलाइनिंग दस्तावेज़ों की मांग की गई है।

रैगिंग जैसी गंभीर घटनाओं को रोकने के लिए विश्वविद्यालय में परिवर्धित निगरानी, चेतना अभियान और नीति सुधार की आवश्यकता स्पष्ट हुई है।

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