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झारखंड पुनरुथान अभियान ने पश्चिमी सिंहभूम DC के मनमानी रवैये की कड़ी निंदा की

झारखंड पुनरुत्थान अभियान ने डीसी चंदन कुमार पर लगाए गंभीर आरोप

चाईबासा : झारखंड पुनरुत्थान अभियान ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त चंदन कुमार के प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष सन्नी सिंकु ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि झारखंड एक कल्याणकारी राज्य है, जहां लोक प्रशासक का दायित्व होता है कि वह नागरिकों की स्वतंत्रता, गरिमा और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की रक्षा करे। लेकिन वर्तमान उपायुक्त जिस प्रकार से कोल्हान पोड़ाहाट क्षेत्र के मानकी-मुंडाओं के साथ व्यवहार कर रहे हैं, वह उपनिवेशवादी शासन से भी अधिक कठोर और निष्ठुर प्रतीत होता है।

सन्नी सिंकु ने कहा कि यदि उपायुक्त एक सच्चे कल्याणकारी प्रशासक की भूमिका निभाते, तो जिले में शांति व्यवस्था को बनाए रखते, जिससे नागरिक सुरक्षित और स्थिर जीवन जी पाते। लेकिन लालफीताशाही और कठोर रवैये के कारण जिला अशांति के माहौल से जूझ रहा है और मानकी-मुंडा समुदाय खुद को अपमानित और प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।

अभियान के केंद्रीय महासचिव अमृत मांझी ने भी उपायुक्त पर सवाल उठाते हुए कहा कि काश! चंदन कुमार सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन जैसे मामलों में भी उतनी ही कठोरता दिखाते, जितनी मानकी-मुंडा समुदाय के खिलाफ दिखा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उपायुक्त की कार्यशैली दोहरी है, तभी तो शिक्षित बेरोजगारों ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों और स्वास्थ्य विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया में भेदभाव को लेकर उपायुक्त कार्यालय के समक्ष धरना दिया था।

अमृत मांझी ने कहा कि यदि जिला प्रशासन पारदर्शी और जवाबदेह होता, तो लोगों को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने की नौबत नहीं आती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उपायुक्त पंचशील सिद्धांतों का पालन करने के बजाय पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में दोषपूर्ण विकास मॉडल थोप रहे हैं।

झारखंड पुनरुत्थान अभियान ने उपायुक्त चंदन कुमार के इस रवैये पर कड़ा एतराज जताया है और कहा है कि इस तरह की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति आदिवासी हितों और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है।

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