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सुन्दरकाण्ड पाठ के चमत्कारिक लाभ::

🌻सम्पूर्ण रामायण को वाल्मीकि जी ने कई खंडो में विभक्त कर प्रस्तुत किया है। इसमें राम जी के जन्म से लेकर उम्र के हर पड़ाव को दर्शाने का प्रयास किया है। इस सभी खंडो में सुंदर कांड का खासा महत्व रहा हैं क्योंकि इसमें राम भक्त परमवीर हनुमान जी को बताया गया है। हिन्दू धर्म मे सुंदर कांड पाठ का इतना महत्व है कि लोग इस पाठ का वाचन किसी शुभ कार्य को करने से पहले करातें है। वाल्मीकि रामायण में तो इसका महत्व है ही इसके अतिरिक्त तुलसीदास जी की राम चरित मानस में भी इस कांड की व्याख्या बड़े ही रोचक ढंग से की गई है। ऐसा माना जाता है कि इस पाठ का वाचन करने से जातक को सिर्फ हनुमान जी का नहीं, अपितु मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है, क्योंकि जो भी जातक हनुमान का जाप करता है, उस पर भगवान राम स्वयं कृपा दृष्टि बरसाते रहते हैं।’

’👉क्या है सुंदर कांड पाठ का महत्वः-’
’☘परम भक्त बजरंगबली को बल, शक्ति, और शौर्य का पर्याय माना गया है। कहते है कि इनकी स्मृति मात्र से व्यक्ति को भय से मुक्ति मिल जाती है। अब चाहे हनुमान चालीसा हो या सुंदरकांड इन दोनों का ही पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। जो भी जातक प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करता है उसकी एकाग्रता और बुद्धि में वृद्धि होती है और वह सदैव आत्मविश्वास से भरा रहता हैं। जिस तरह अपनी शक्तियों को स्मरण कर हनुमान जी ने बड़े.बड़े कार्यों को सरलता से पूरा कर दिया था उसी तरह सुंदरकांड के पाठ करने से व्यक्तियों को अपनी वास्तविक शक्तियों का पता चलता है। अपनी वास्तविक शक्तियों को जानकर व्यक्ति कई बाधाओं से पार कर जाता है। सुंदरकाण्ड के पाठ करने से व्यक्ति मानसिक और शारीरिक दोनो ही रूप से मजबूत होता है और विरोधियों को परास्त करने में सक्षम बनता है। सिर्फ यही नहीं, सुंदरकांड व्यक्ति के अंदर सकारात्मक भावनाओं को भी पैदा करता है और इसका पाठ करने से व्यक्ति समाज के लिए अच्छे काम करने के प्रति भी प्रेरित होता है। यही वजह है कि पंडित और ज्योतिषाचार्य भी लोगों को सुंदर कांड का पाठ करने की सलाह देते हैं।’

’👉सुंदरकांड पाठ कुंडली मे उग्र ग्रहो को शांत करता है:-
’☘सुंदरकांड का पाठ करने से कुंडली में विराजमान बुरे ग्रहों का प्रभाव कम हो जाता है। मंगलवार और शनिवार के दिन सुंदर कांड का पाठ करने से मंगल और शनि ग्रह शांत हो जाते हैं। सुंदर कांड का पाठ करने से शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती के दौरान भी आप कई मुसीबतों से बच सकते हैं। इसके साथ ही राहु.केतु जैसे बुरे ग्रहों के दुष्परिणामों को दूर करने के लिये भी सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है।’

’★सुंदरकांड का पाठ नकारात्मक विचारों को खत्म करता है।’
’☘सुंदरकांड का पाठ रोजाना करने से आपके अंदर की सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश हो जाता हैं। इस पाठ को करने से आपके घर में भी भूत.प्रेत, बुरी नजर, तंत्र मंत्र और जादू टोने से जुड़ी कोई बाधा नहीं आती है। सुंदरकांड का पाठ करना न केवल आपके लिए, बल्कि आपके घर में रहने वाले सभी सदस्यों के लिए लाभकारी सिद्ध होता है। सुंदरकांड का पाठ यदि आप नियमित रूप से न भी कर पाएं तो सप्ताह में एक दिन तो अवश्य करना चाहिए और वर्ष में एक बार पूरे घर की शुद्धि के लिए बड़े स्तर पर इसका पाठ कराएं, जिससे घर के आस पड़ोस पर भी इसका असर हो।’

’👉सुंदरकांड पाठ करने की पूजा विधि:-....’
’☘सुंदरकांड का पाठ करने का कोई विशेष तरीका तो शास्त्रों में वर्णित नही है। यदि आपके मन में श्रद्धा है तो आप सुबह और शाम के समय पवित्र मन से इस पाठ का वाचन कर सकते हैं। हालांकि यदि सुंदर कांड. का पाठ किसी विशेष लाभ की प्राप्ति के लिए कर रहे हैं तो नीचे दी गई विधि के अनुसार आपको सुंदर कांड का पाठ करना चाहिए।’

’🌻सुंदर कांड का पाठ यदि शनिवार या मंगलवार के दिन कराएं तो जिस भी उद्देश्य से इसे कराया गया है उसके फल शीघ्र अतिशीघ्र मिलतें हैं। सुंदरकांड को शुरू करने से पहले स्नान ध्यान करें और स्वच्छ कपड़े जरूर धारण करें। और बजरंगबली और भगवान राम का स्मरण करें। इसके बाद किसी मंदिर में या फिर घर के पूजा स्थल पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। हनुमानजी के साथ.साथ आप मंदिर में भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा या तस्वीर भी स्थापित कर सकते हैं। इसके बाद हनुमान जी को फूल-फल इत्यादि अर्पित करें। सुंदर काण्ड शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा करें।  

किसी भी पूजा को आरम्भ करने से पूर्व भगवान गणेश की पूजा आवश्यक है, क्योंकि भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। जिस उद्देश्य से आप सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं, उसके पूरा होने की कामना करते हुए सुंदरकांड का पाठ करें। सुंदरकांड का पाठ करते समय मन को भटकने न दें। एकाग्रता बनाएं रखे। जिस दिन भी आप सुंदरकांड का पाठ करें, उस दिन वासना जनित विचारों को मन में न आने दें और न ही वासना के वशीभूत होकर कोई काम करें। मास. मदिरा इत्यादि का त्याग बेहद जरूरी हैं।’


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