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सभी प्रकार की कलह शांत करता है प्रदोषकालीन रुद्राभिषेक :स्वामी पूर्णानंदपुरी


अलीगढ। ‘प्रदोष का सबसे बड़ा महत्व इसलिए है कि चन्द्रमा को, कृष्णपक्ष में  प्रदोष पर्व पर भगवान शंकर ने अपने मस्तक पर धारण किया था। यह सोम प्रदोष के नाम से जाना जाता है। उपासना करने वाले को एवं प्रदोष करने वाले को सोम प्रदोष से व्रत एवं उपवास प्रारंभ करना चाहिए। प्रदोष काल में उपवास में सिर्फ हरे मूंग का सेवन करना चाहिए, क्योंकि हरा मूंग पृथ्‍वी तत्व है और मंदाग्नि को शांत रखता है।’ 

यह बात वैदिक ज्योतिष संस्थान के अध्यक्ष परमपूज्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने अलीगढ जनपद स्थित विजयगढ़ देवी तलावर मंदिर पर भगवान शिव के रुद्राभिषेक के दौरान कही।

सोमवार को अलीगढ शहर के निकट विजयगढ़ में देवी तलावर मंदिर के वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में भारत देश सहित विश्व के तमाम देशों में फैले कोरोना जैसे घातक विषाणु से रक्षार्थ भगवान शिव से खुशहाली की कामना करते हुए रुद्राभिषेक किया बयौ स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज के सानिध्य में आचार्य गौरव शास्त्री, कपिल शास्त्री, हर्ष वेदपाठी आदि आचार्यों ने सोशल डिस्टेंस का पालन कर मुख्य यजमान आशीष तायल एवं शालू तायल द्वारा भगवान शिव परिवार का दूध, दही, घी, शहद, बूरा,  पंचामृत आदि से स्नान करवाकर चन्दन,  भस्म से शृंगार कर भगवान शिव को फल, फूल, वस्त्र आदि अर्पित किये।

 इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने बताया कि, ‘रुद्र भगवान शिव का ही प्रचंड रूप हैं। इनका अभिषेक करने से सभी ग्रह बाधाओं और सारी समस्याओं का नाश होता है। रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों के पाठ मात्र से अनेक रोगों का नाश हो जाता है। शिव जी को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ तरीका है रुद्राभिषेक।’

 इस अवसर पर आशीष तायल, शालू तायल, आयुषी तायल, ध्रुव तायल आदि ने इस महामारी से निजात हेतु भगवान शिव से प्रार्थना कीै। वहीँ आशीष तायल ने क्षेत्र की जनता का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि, ‘मैं सभी धर्म प्रेमियों का ह्रदय से आभारी हूँ जिन्होंने लॉकडाउन का पालन कर मंदिर परिसर पर भीड़ एकत्रित नहीं की।’

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