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मोहम्मद साहब की जयंती पर विशेष गोष्ठी

मोहम्मद साहब की जयंती पर विशेष गोष्ठी
विषय मोहम्मद साहब की आधुनिक युग में उनके दर्शन की महत्वपूर्ण संदेश ।

डा. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम फाउंडेशन केंद्रीय ऑफिस - मुगलसराय,चंदौली,
05- 09- 2025

ईद-ए-मिलादुन्नबी (मौलिदुन्नबी) के अवसर पर डा. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम फाउंडेशन द्वारा एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य पैग़म्बर मोहम्मद साहब के जीवन, उनके उपदेशों और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर विमर्श करना था।
🟢 गोष्ठी के मुख्य बिंदु

1. ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य – वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि 570 ईस्वी में मक्का में जन्मे मोहम्मद साहब ने अन्याय और अज्ञान के बीच मानवता, समानता और एकेश्वरवाद का मार्ग दिखाया।
2. जीवन-दर्शन और उपदेश –

तौहीद (एकेश्वरवाद)

इंसाफ़ और समानता

भाईचारा और करुणा

शिक्षा और ज्ञान का महत्व

3. समाज सुधार – महिलाओं के अधिकार, ग़ुलामी प्रथा का विरोध और गरीबों की सहायता पर उनके प्रयासों को रेखांकित किया गया।
4. समकालीन महत्व – वक्ताओं ने कहा कि आज की असहिष्णुता और हिंसा से भरे दौर में पैग़म्बर का शांति और सद्भाव का संदेश और अधिक प्रासंगिक है।

गोष्ठी में फाउंडेशन के अध्यक्ष इरशाद अहमद (बबलू) ने बताया की मोहम्मद साहब की शिक्षाएँ केवल इस्लाम धर्म तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं । वर्तमान समय की चुनौतियों का समाधान उनके आदर्शों में निहित है ।

इस अवसर पर फांउडेशन के सचिव एखलाक अहमद ने बताया की मोहम्मद साहब के उपदेशों का मूल भाव तौहीद (एकेश्वरवाद) – एक ईश्वर में विश्वास है।
इंसाफ़ व समानता – जाति, लिंग, नस्ल के भेद से परे न्याय है।
भाईचारा और करुणा – सभी के प्रति दया और संवेदनशीलता है।
ज्ञान व शिक्षा का महत्व – “ज्ञान हासिल करना हर पुरुष और स्त्री पर फ़र्ज़ है”।

फांउडेशन के संस्थापक ट्रस्टी असद इकबाल पत्रकार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा
मोहम्मद साहब का जीवन केवल मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है। आज जरूरत है कि उनके जीवन-दर्शन को संकीर्ण धार्मिक दृष्टिकोण से बाहर निकालकर सार्वभौमिक मानव मूल्यों के रूप में अपनाया जाए।

फांउडेशन के ट्रस्टी सदस्य आनंद बोधि (दीपक कुमार) ने सभी सदस्यों को बधाई देते हुए कहा की “आज के वैश्विक समाज में जब हिंसा, आतंक और भेदभाव बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे समय में मोहम्मद साहब का शांति और करुणा का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो जाता है। उनके आदर्श हमें यह सिखाते हैं कि धार्मिक सहिष्णुता, आपसी सौहार्द और सामूहिक विकास ही मानवता का वास्तविक मार्ग है। हमें यह भी समझना होगा कि पर्यावरण संरक्षण, नैतिक अर्थव्यवस्था और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में उनके दृष्टिकोण आज की दुनिया को संतुलन और दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”
ओशो ने भी बताया है की "इस्लाम का असली अर्थ है प्रेम और आत्मसमर्पण, न कि कट्टरता या हिंसा।"

इस अवसर पर उपस्थित फाउंडेशन के सदस्यगण स्थानीय लोग रहे।

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