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"I Love Muhammad" – सियासत या मोहब्बत? ✍️ लेखक: M Alam

"I Love Muhammad" – सियासत या मोहब्बत?

✍️ लेखक: M Alam

आजकल सोशल मीडिया और सड़कों पर "I Love Muhammad" का नारा गूंज रहा है। बहुत से लोग पूछ रहे हैं – क्या इसके पीछे सिर्फ़ मोहब्बत है या कहीं सियासत भी छुपी हुई है? और सबसे बड़ा सवाल – क्या भारत के संविधान में ऐसा कहना अपराध माना जाएगा?

मोहब्बत का इज़हार

पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ से मोहब्बत हर मुसलमान के ईमान का हिस्सा है। "I Love Muhammad" कहना असल में एक भावनात्मक इज़हार है, जिसमें कोई बुराई नहीं। जैसे कोई कहे "I Love Krishna" या "I Love Jesus" – ये हर इंसान का निजी अधिकार है।

सियासत का रंग

लेकिन सच्चाई यह भी है कि हमारे देश में धर्म और राजनीति अक्सर साथ-साथ चलते हैं। धार्मिक नारे कई बार वोटबैंक की राजनीति में बदल जाते हैं। नेताओं को मालूम है कि धर्म की भावनाएं लोगों को जल्दी जोड़ती हैं, इसलिए कभी-कभी ऐसे नारों को राजनीतिक हथियार बना दिया जाता है।

संविधान क्या कहता है?

भारत का संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Article 19(1)(a)) देता है। इसका मतलब है कि आप "I Love Muhammad", "I Love Krishna" या "I Love Jesus" – खुलकर कह सकते हैं। यह जुर्म नहीं है।
हाँ, अगर कोई नारा दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने, नफरत फैलाने या भड़काने के लिए इस्तेमाल करे, तो कानून (IPC 153A, 295A आदि) के तहत कार्रवाई हो सकती है।

निचोड़

"I Love Muhammad" कहना अपराध नहीं है। यह हर इंसान का अधिकार है। लेकिन ध्यान रहे कि मोहब्बत के नारे को मोहब्बत तक ही सीमित रखें। इसे नफरत या सियासत का ज़रिया बनाना असली मोहब्बत की तौहीन है।

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