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सड़कें सिर्फ़ मंत्रियों के लिए? टैक्स देने वाली जनता को क्यों मिलती है टूटी-फूटी राह

महाराष्ट्र में सड़क व्यवस्था की तस्वीर किसी मज़ाक से कम नहीं लगती। जब तक मंत्री या मुख्यमंत्री का काफ़िला किसी मार्ग से नहीं गुजरता, तब तक सड़क की मरम्मत या निर्माण की सुध लेना शायद अधिकारियों की प्राथमिकता ही नहीं होती।

आम आदमी, जो हर महीने-हर साल सरकार को टैक्स देता है, भारी-भरकम रोड टैक्स भी चुकाता है, उसे बदले में मिलती है सिर्फ़ धूल और गड्ढों से भरी सड़क। मंत्री आते हैं, आदेश देते हैं, अफसर कुछ दिन सक्रिय होते हैं और फिर सबकुछ पुराने ढर्रे पर लौट जाता है।

यह भी विडंबना है कि हर महीने करोड़ों रुपये खर्च करके सड़कें बनाई जाती हैं, लेकिन पहली ही बारिश में उनमें दरारें पड़ जाती हैं और गड्ढों का मेला लग जाता है। यह स्थिति सिर्फ़ भ्रष्टाचार और घटिया कामकाज की पोल खोलती है।

उपमुख्यमंत्री अजित पवार का एक बयान अब भी लोगों की ज़ुबान पर है, जब उन्होंने कहा था कि कंपनियां महाराष्ट्र छोड़कर सिर्फ़ अव्यवस्था के कारण बाहर जा रही हैं। आज हिंजवड़ी से पिरंगुट तक का रास्ता इसका सबसे बड़ा सबूत है जर्जर, उपेक्षित और जनता की परेशानी का कारण।

जनता पूछ रही है: क्या सड़कें सिर्फ़ मंत्रियों और अफ़सरों के काफ़िले के लिए बनती रहेंगी या टैक्स भरने वाले आम नागरिक को भी कभी सही सड़क मिलेगी?

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